दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 73 और 74वें संविधान में संशोधन कराकर पंचायतों को मजबूत बनाने का बड़ा कदम उठाया था। संशोधन के बाद त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव हुए थे।
इसके तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र और जिला पंचायतों को 14वें वित्त आयोग से विकास कार्यों के लिए बजट मिलना था, लेकिन मोदी सरकार ने इस आयोग के तहत क्षेत्र, जिला पंचायतों को मिलने वाले बजट पर रोक लगाकर बजट ग्राम पंचायतों को बढ़ाकर दे दिया है।
बजट नहीं मिलने से जहां गांवों के विकास पर विपरीत असर पड़ रहा है। वहीं पंचायतों के सदस्य चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं से किए वायदों को लेकर खासे चिंतित हो गए हैं। हालात यह हैं कि कई सदस्य खाली हाथ गांव जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज का सपना संजोया था। उनके सपने को साकार करने के लिए दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में 73 और 74वें संविधान में संशोधन कराया था। त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव के तहत ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र, जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव हुए।
व्यवस्था के तहत केंद्र से विभिन्न आयोगों के तहत ग्राम पंचायतों के 100 प्रतिशत बजट में से 50 प्रतिशत ग्राम, 30 प्रतिशत क्षेत्र जबकि 20 प्रतिशत बजट जिला पंचायत को मिल रहा था। पंचायतें भारत सरकार की गाइडलाइन से विकास कार्य संपादित करते हैं।
इस बार केंद्र ने क्षेत्र, जिला पंचायतों को 14वें वित्त आयोग से मिलने वाले बजट पर रोक लगा दी है जबकि ग्राम पंचायतों का बजट बढ़ा दिया है। बजट नहीं मिलने से गांवों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
सदस्यों ने चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को गांवों के विकास के बड़े सपने दिखाए थे। बजट नहीं मिलने के कारण उनके सामने अब मुसीबत खड़ी हो गई है।
बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य बजट की बहाली की मांग को लेकर कई बार ब्लॉक, जिला पंचायत में तालाबंदी करके प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेज चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार चुप्पी साधे बैठी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश सिंह ऐठानी ने केंद्र सरकार पर क्षेत्र और जिला पंचायतों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग से पंचायत को साल में 1.68 करोड़ रुपये मिलते थे।
पंचायत के सदस्यों को यह बजट समान रूप से बंटता था। इससे स्ट्रीटलाइट, स्वच्छता, शौचालय, स्नानागार आदि निर्माण कार्य होते थे। केंद्र से बजट न मिलने से विकास कार्यों पर विपरीत असर पड़ रहा है।