बागेश्वर में अभ्यास करतीं फुटबॉलर मनीषा मेहता। विज्ञप्ति
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बागेश्वर। चलकाना (लखमारा) गांव की मनीषा मेहता को बागेश्वर की बालिका वर्ग में जिले की पहली राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी होने का गौरव हासिल है। फुटबॉल के अलावा उन्हें वॉलीबाल और खो-खो खेल में भी महारत हासिल है। इन खेलों में भी उन्होंने राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग कर चुकी हैं। मनीषा की तीन बहनें भी उनके पदचिन्हों पर चलकर राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन करना चाहती हैं।
मनीषा के पिता मदन सिंह मेहता स्वरोजगार करते हैं जबकि उनकी माता नंदी देवी गृहिणी हैं। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी मनीषा ने कक्षा आठ तक की शिक्षा गांव के स्कूल में हासिल की। हाईस्कूल से वह पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय आ गई। इसी दौरान उनका रुझान खेलों की तरफ हुआ और उन्होंने वॉलीबाल खेलना शुरू कर दिया। तीन साल के वॉलीबाल कॅरियर में उन्होंने राज्य स्तरीय सब जूनियर वॉलीबाल प्रतियोगिता भी खेली। 2017 में उन्होंने फुटबॉल खेलना शुरु किया। कोच नीरज पांडेय के सानिध्य में बागेश्वर से फुटबॉल खेलने वाली वह पहली महिला फुटबॉलर हैं। कोच पांडेय ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें कड़ी ट्रेनिंग देनी शुरु की। जिसका अच्छा परिणाम निकला और इसी वर्ष 26 जुलाई से 10 अगस्त तक ओडिशा के कटक में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए उनका चयन हो गया। इस तरह से राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए उत्तराखंड की टीम में शामिल होने वाली वह जिले की पहली बालिका फुटबॉलर बनीं।
मनीषा के कोच नीरज पांडेय बताते हैं कि मनीषा बेहतरीन खिलाड़ी हैं। उनकी तकनीक और खेल को परखने की क्षमता शानदार है। जिसके चलते वह महिला फुटबॉलरों में जिले की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी है। मनीषा भी अपनी सफलता के लिए कोच के योगदान को अहम मानती हैं।
माता-पिता का मिला साथ, तीनों बहनें भी उतरी मैदान में
बागेश्वर। मनीषा के खेल को आगे बढ़ाने में माता और पिता का अहम योगदान है। पिता मदन मेहता कहते हैं कि मनीषा से पहले उनके गांव की कोई बालिका खेलकूद को लेकर सोचती भी नहीं थी। मनीषा ने परिवार के अलावा गांव का नाम रोशन किया है। मनीषा को देखकर उनकी तीनों बहनें किरन, गीता और रानी भी फुटबॉल खेलने लगी हैं और बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।