बागेश्वर। जिले में खेतीबाड़ी का काम जोर-शोर से चल रहा है। कामकाज के फेर में गर्भवती महिलाएं सेहत को नजरअंदाज कर रही हैं, जो प्री डिलीवरी का कारण बन रहा है। जिला अस्पताल में दो महीने के अंतराल में पांच महिलाओं की प्री डिलीवरी करवाने की बात सामने आई है। जिले में इन दिनों महिलाएं गेहूं, मसूर आदि की खेती को समेटने के लिए दिन रात मेहनत कर रही हैं। खेती समेटने के चक्कर में महिलाएं खासकर गर्भवती महिलाएं सेहत का भी ध्यान नहीं रख रही हैं। इसका असर भी देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रीमा उपाध्याय के अनुसार इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाएं जांच के लिए अस्पताल कम आ रहीं हैं। गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य की तरफ लापरवाही बरत रही हैं। गर्भावस्था के आठवें महीने में भी महिलाएं दिन भर खेतों में काम कर रही हैं। जिससे काम का प्रेशर बढ़ता है और समय से पहले ही बच्चेदानी के खुलने का डर बना रहता है।
महिला चिकित्साधिकारी डॉ. गायत्री पांगती बताती हैं कि मार्च महीने से अभी तक पांच महिलाओं की प्री डिलीवरी हो चुकी है। प्री डिलीवरी होने से बच्चे के स्वास्थ्य को भी खतरा रहता है। बच्चा कमजोर पैदा होता है।
डॉ. रीमा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान भारी वजन वाली चीजें नहीं उठानी चाहिए, शरीर को आराम देना चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण है कि समय-समय पर चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए।