गांधी विचार पर गहराई से अध्ययन करना है तो जिंदगी में एक बार कौसानी जरूर आए। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1929 में कौसानी के लाल बंगला में ही 14 दिन में अनासक्ति योग पर किताब लिखी थी। उस समय का लाल बंगला अब अनासक्ति आश्रम के नाम से जाना जाता है।
राष्ट्र पिता महात्मा गांधी 1929 में जब भारत भ्रमण पर निकले तब वह थकान मिटाने कौसानी के एक चाय बागान के मालिक के आग्रह पर कौसानी के लाल बंगले में रुके। कौसानी की खूबसूरती देखकर यहां महात्मा गांधी 14 दिन तक रुके। इस दौरान उन्होंने अनासक्ति योग पुस्तक लिखी।
साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट ने बताया कि अनासक्ति आश्रम भवन पूर्व में ग्राम पंचायत का बंगला था। तब स्थानीय लोग इसे कौसानी का लाल बंगला कहते थे। आजादी के बाद उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सीएम सुचेता कृपलानी ने बंगले को गांधी स्मारक निधि को सौंप दिया था।
अनासक्ति आश्रम के रमेश चंद्र पांडे और कौसानी के पूर्व जिला पंचायत सदस्य बबलू नेगी ने बताया कि गांधी विचार पर अध्ययन करने खासतौर पर अक्तूबर में देश-विदेश के सैकड़ों गांधी विचारक यहां आते है। दो अक्तूबर को आश्रम में गांधी विचार पर गोष्ठी और प्रार्थना होगी।