बागेश्वर। गंभीर पानी का संकट झेल रहे बागेश्वर जिले के लोगों की निर्भरता प्राकृतिक जलस्रोतों और सड़क किनारे खुदे हैंडपंपों से बुझ रही है। जिले में 16 हैंडपंप ड्राई घोषित कर दिए गए हैं। इन हैंडपंपों में पानी नहीं आता।
जिले में इस समय 528 हैंडपंपों से लोगों के हलक तर हो रहे हैं। पेयजल योजनाओं में पानी की कमी से त्रस्त और जल संयोजन से वंचित लोग इन्हीं हैंडपंपों पर निर्भर हैं। हैंडपंपों और जलधारों में दिनभर लोगों की भीड़ जमा रहती है। लोग देर रात तक जरूरत के पानी का इंतजाम करते हैं। पांच साल पहले इन हैंडपंपों को स्थापित करने के कुछ समय तक पानी चला। उसके बाद पानी आना बंद हो गया। जिला मुख्यालय के साथ ही कपकोट, कठपुड़ियाछीना, कपकोट के दुलम, गरुड़, कांडा क्षेत्र के कई इलाकों में पानी का संकट वर्षभर रहता है।
जिले में सरयू, गोमती, पिंडारी समेत तमाम नदियां हैं। पानी की प्रचुरता के बाद भी जल संकट होना समझ से परे है। नदियों का उपयोग कर जिले को पेयजल संकट से मुक्त किया जा सकता है। इस दिशा में काम करने की जरूरत है।
वंदना ऐठानी, जिपं सदस्य बागेश्वर
सरयू और गोमती नदी के संगम पर बसे बागेश्वर में पानी की कमी से तमाम सवाल खड़े होते हैं। वर्षभर पानी की कमी बनी रहती है। यहां से बहने वाली नदियां कई प्रांतों को पानी उपलब्ध कराती हैं, लेकिन बागेश्वर की पानी की जनता पेयजल से त्रस्त रहती है।
सुनीता टम्टा पूर्व कनिष्ठ प्रमुख बागेश्वर
जिले में 528 हैंडपंप स्थापित हैं। इनमें कुछ खराब पड़े थे। कुछ दिन पहले ही टीम बुलाकर खराब हैंडपंपों को ठीक कर दिया गया है। 16 हैंडपंपों में पानी न होने के कारण ड्राई घोषित कर दिया गया है।
-सीएस देवड़ी, ईई जल संस्थान बागेश्वर।