बागेश्वर। जिले में जंगलों के जलने का सिलसिला लगातार चल रहा है। जिला मुख्यालय समेत सभी तहसीलों में जंगलों की आग फैल गई है। गरुड़ और धरमघर के जंगल धधक रहे हैं। फायर सीजन में आग की 61 घटनाएं दर्ज हुईं हैं। आग से 75 हेक्टेयर जंगल जल गया और करीब 2.15 लाख का नुकसान हुआ है। वन विभाग लगातार आग बुझाने के दावे कर रहा है, लेकिन जिस गति से जंगल जल रहे हैं उससे विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
गरुड़ के बैजनाथ रेंज और कांडा और दुग नाकुरी से लगे धरमघर रेंज के जंगल सोमवार रात से धधक रहे हैं। आग के कारण वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। आग से ग्रामीणों के जनजीवन पर भी असर पड़ा है। जंगलों में होने वाली चारा पत्ती जलकर नष्ट होने से पशुपालकों की परेशानी बढ़ रही है। कई गांवों में जंगल की आग आबादी तक पहुंच रही है। आग से वन्यजीव जंतुओं का जीवन भी संकट में पड़ रहा है। इस कारण हिंसक जानवर भी आबादी की ओर आ रहे हैं। जिले के जंगलों की आग से विभाग के आग बुझाने के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों में भी विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
जिला मुख्यालय से लेकर गांवों तक आग ही आग
बागेश्वर। जिले में आग का दायरा सभी तहसील क्षेत्रों तक बढ़ गया है। जिला मुख्यालय के समीपवर्ती जौलकांडे, थापली, छतीना, बिलखेत से गरुड़ के बैजनाथ रेंज, कांडा के मनकोट, घिंघारुतोला, कपकोट की पुंगरघाटी और धरमघर रेंज के जंगल आग की भेंट चढ़ चुके हैं। जंगलों की आग से जिला मुुख्यालय सहित घाटी वाले अधिकतर इलाकों में धुआं भर गया है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
अस्थमा के मरीज बरतें विशेष सावधानी : सीएमएस
बागेश्वर। जंगल की आग के धुएं से जिला अस्पताल में अस्थमा, सांस, आंख के मरीजों की तादाद बढ़ रही है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीके टम्टा का कहना है कि धुआं फेफड़ों के संक्रमण और अस्थमा के मरीजों के लिए घातक होता है। उन्होंने ऐसे मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेकर विशेष सावधानी बरतने का सुझाव दिया है।
जंगल की आग को काबू करने के लिए वन विभाग के कर्मचारी और फायर वाचर मशक्कत कर रहे हैं। कुछ जंगलों में शॉर्ट सर्किट से भी आग लग रही है। अराजक तत्व भी वनों को आग के हवाले कर रहे हैं। जंगलों को बचाने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। आग लगाने वालों को पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। - हिमांशु बागरी, डीएफओ, बागेश्वर।