बागेश्वर। जिला मुख्यालय के पास के जंगल रातभर जलते रहे। पूरे नगर में धुआं छा गया। एक ही रात में जंगल जलने की आठ घटनाएं हुई हैं जो इस सीजन की सर्वाधिक हैं। इस फायर सीजन में वनाग्नि की 41 घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें 22 घटनाएं जून में हुई हैं। आग से अब तक 59.90 हेक्टेयर वन संपदा जल गई। 1,79,700 रुपये का नुकसान हुआ है।
फरवरी में फायर सीजन शुरू होने के बाद से मौसम ने वन विभाग को काफी राहत पहुंचाई थी। मई तक जिले में वनाग्नि की मात्र 19 घटनाएं दर्ज हुईं थी। जून शुरू होते ही हालात बदल गए हैं। लगातार जंगल जलने लगे हैं। सबसे अधिक वनाग्नि की घटनाएं जिला मुख्यालय के आसपास के जंगलों में हो रही हैं। धरमघर रेंज के जंगल भी इस वर्ष आग की चपेट में हैं। अन्य वर्षों में वनाग्नि से सबसे अधिक प्रभावित रहने वाले गरुड़ क्षेत्र के जंगलों के लिए राहत भरी खबर है। छिटपुट घटनाओं को छोड़कर क्षेत्र में वनाग्नि की बड़ी घटना नहीं हुई है।
शुक्रवार शाम से शनिवार तक बागेश्वर क्षेत्र के बिलखेत, कुकुड़ामाई, उत्तरी खबडोली, गोगिनापानी और धरमघर क्षेत्र के गुरना, मजीगांव, करीमपुर और कपकोट के कफलटॉप, चिरपतकोट के जंगल में आग लगी। आग से वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है। घाटी वाले इलाकों में धुआं छाने से लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रेंजर श्याम सिंह करायत ने बताया कि पूरी रात वन विभाग की टीम आग बुझाने में जुटी थी। कुछ अराजक तत्व वनों में आग लगा रहे हैं। ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है। लोगों से भी अपील है कि वह जंगल जलाने वालों को पकड़वाने में विभाग का सहयोग करें।