बागेश्वर के जाखनी बीट के जंगल में लगी आग से जलती वन संपदा। विज्ञप्ति
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बागेश्वर। बागेश्वर में जंगलों में आग लगने का सिलसिला थम नहीं रहा है। जिले में अब तक जंगलों में आग लगने की 127 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 186.12 क्षेत्रफल हिस्से में जंगल को नुकसान पहुंचा है। इन घटनाओं में पांच लाख 65 हजार 760 रुपये की वन संपदा का नुकसान हो चुका है।
बुधवार को धरमघर क्षेत्र के जाखनी बीट के जंगलों में आग धधकती रही। आग से वन संपदा को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है। गागरीगोल क्षेत्र के जंगलों में भी आग लगी रही। मंगलवार की रात को जिला मुख्यालय के चौरासी गांव के पास कई घंटे तक आग लगी रही। आग से वन संपदा को जबरदस्त नुकसान पहुंच रहा है। जंगलों में लग रही आग के सामने वन विभाग के संसाधन बौने साबित हो रहे हैं। एक प्रकार से वन विभाग असहाय हो गया है। वन विभाग के 29 क्रू स्टेशनों में तैनात वन कर्मी जंगलों की आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। हर तरफ लगी आग को बुझाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है।
जंगलों में लगी आग से वातावरण में धुंध छाई हुई है। राख के कण जमीन में गिर रहे हैं। धुंध के कारण आंखों में जलन हो रही है। सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए धुंध परेशानी खड़ी कर रही है।
सिमार के घरों तक पहुंची आग की राख
गरुड़ (बागेश्वर)। जंगलों की आग से गरुड़ क्षेत्र के आसमान में धुंध छायी है। समूचे क्षेत्र में लोगों को सांस लेने में दिक्कतें हो रही है। उधर, सिमार गांव का हर घर राख की चपेट में है। सिमार गांव की प्रधान शीला राणा, ढ़िकुरा की प्रधान चंपा पांडे, पूर्व बीडीसी सदस्य सुनील पांडे ने बताया कि तीन दिन पूर्व सिमार गांव में भीषण आग लगी थी। इसकी राख हवा में उड़कर लोगों के घरों में प्रवेश कर रही है। राख उड़ने से ग्रामीणों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मोहन सिंह मेहता सीएचसी बैजनाथ के प्रभारी एसएस गुंज्याल ने बताया जंगलों की आग की धुंध से बचने के लिए मास्क और चश्मा पहनना चाहिए। धुंध से वायरल फीवर होने का खतरा बढ़ जाता है।