2023-24 में मिशन के तहत नहीं हो सका नया काम
सुशीला मेहरा
बागेश्वर। उद्यान विभाग पिछले दो सालों से जिले में एप्पल मिशन चला रहा है। अनुदान में 20 फीसदी गिरावट के कारण किसानों का रुझान सेब की बागवानी की तरफ कम हो रहा है। इसका असर यह रहा है कि वर्ष 2023-24 में एप्पल मिशन के तहत जिले में कोई काम नहीं हुआ।
जिले में परंपरागत तौर से सेब की बागवानी करीब 15 सालों से हो रही है। जिले में दो वर्ष पूर्व एप्पल मिशन शुरू किया गया था। 12000 फुट ऊंचाई वाले क्षेत्रों को सेब की बागवानी के लिए चुना गया। पिछले साल जिले में 50 क्विंटल सेब की पैदावार हुई। वर्ष 2022-23 तक किसानों को सेब पर 80 प्रतिशत अनुदान देता था। अब 60 प्रतिशत ही अनुदान मिलता है।
उद्यान विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मिशन के तहत सेब के बागान में 12,00000 रुपये लागत आती है। इसमें 9,60000 रुपये उद्यान विभाग की ओर से अनुदान के रूप में दिए जाते थे। सेब की बागवानी में 20 फीसदी अनुदान घटने का असर यह है कि जिले में वर्ष 2023-24 में एप्पल मिशन के तहत कोई नया काम नहीं हो सका। संवाद
इनसेट
जिले के सेब उत्पादन वाले क्षेत्र
झूनी खलझूनी, कर्मी, बघर, सात रतबे, शामा, कौसानी
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जिले में चार एकड़ में सेब के बगीचे
बागेश्वर। उद्यान विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में एप्पल मिशन के तहत खलझूनी, कर्मी, शामा और सात रतबे क्षेत्र में एक-एक एकड़ के बगीचे बनवाए गए हैं। जिनमें 533 एम111 रूट स्टोक प्रजाति के सेब के पेड़ लगाए गए हैं। इस प्रजाति के सेब दो साल में फल देने लगते हैं। अगले साल से ही इन बगीचों में सेब की पैदावार शुरू हो जाएगी। संवाद
कोट
सेब की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। किसान आवेदन भी कर रहे हैं।इस वर्ष जिले में अधिक कार्य नहीं कर पाए लेकिन पूर्व में चयनित स्थानों पर ही ज्यादा ध्यान देंगे। -कुलदीप जोशी, वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक बागेश्वर