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प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता के लिए बीपीएल कोड की अनिवार्यता समाप्त

Thu, 23 Jun 2016 12:02 AM IST
आनंद बिष्ट/अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़ (बागेश्वर)।
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गरुड़ (बागेश्वर)। केंद्र की मोदी सरकार ने इंदिरा आवास योजना का नाम बदलकर अब प्रधानमंत्री आवास योजना रख दिया है। सरकार की नई गाइडलाइन के अनुसार आवास की पात्रता के लिए केंद्र सरकार ने बीपीएल कोड की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।
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अब दस हजार से कम मासिक आय वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री आवास सूची में आ सकता है। आवास की प्रतीक्षा सूची पांच साल की नहीं बल्कि हर साल ग्राम पंचायत की बैठक में बनेगी। आवास का अनुदान भी 90 हजार से बढ़ाकर एक लाख चालीस हजार रुपये कर दिया है।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दिवंगत पीएम इंदिरा गांधी के नाम पर 1985 में इंदिरा आवास योजना शुरू की थी। तब ग्राम पंचायत के आर्थिक रजिस्टर में अंकित गरीब लोगों को आवास मिलते थे। 2002 के बाद बीपीएल कोड के आधार पर ग्राम पंचायत पांच साल के लिए आवास की प्रतीक्षा सूची तैयार करती थी। अब इस योजना का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया गया है।
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आवास निर्माण के लिए बीपीएल क्रमांक की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। पिछले वर्ष तक मकान बनाने के लिए नब्बे हजार रुपये मिलते थे। अब सरकार इसके लिए एक लाख चालीस हजार रुपये देगी। पीडी हिमांशु जोशी ने बताया नए मानकों के अनुसार पीएम आवास योजना के मकान का निर्माण कुशल मिस्त्री करेंगे। ब्लॉक कार्यालय का जेई आवास की एमबी करेगा। 

ये नहीं आएंगे पीएम आवास की सूची में 
गरुड़ (बागेश्वर)। ग्राम पंचायत के जिस परिवार के पास दोपहिया, तीन, चार पहिया वाहन, फ्रिज, 50 हजार रुपये से अधिक का किसान क्रेडिट कार्ड, पक्का मकान, दस हजार से अधिक मासिक आय, 50 नाली से अधिक जमीन, आयकरदाता, केंद्र, राज्य सरकार से आर्थिक सहायता ली हो। 

प्रतीक्षा सूची में इन्हें मिलेंगे बोनस अंक
गरुड़ (बागेश्वर)। पीएम आवास प्रतीक्षा सूची में ग्राम पंचायत के इन लोगों को एक-एक अंक का बोनस अंक मिलेगा। 16-59 नाबालिग विहीन परिवार के सदस्य, जिस परिवार में 25 वर्ष से ऊपर का कोई साक्षर सदस्य न हो, परिवार का कोई सदस्य अपाहिज, एड्स पीड़ित, कच्चे मकान वाले को बोनस अंक दिए जाएंगे।

मेलाडुंगरी के प्रधान बलवंत भंडारी ने बताया कि पीएम आवास प्रतीक्षा सूची को बनाने में प्रधानों की अहम भूमिका है। ग्राम पंचायत की खुली बैठक में सूची सही बनेगी तो, दो साल बाद ग्राम पंचायतों में कोई आवासहीन नहीं रहेगा।
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