बागेश्वर। पांच बंगाली ट्रैकरों को सुंदरढूंगा लेकर गए लापता गाइड खिलाफ सिंह दानू का शव मिल गया है। ग्रामीणों ने नौ महीने बाद बर्फ में फंसे उनके पार्थिव शरीर को बरामद कर तहसील प्रशासन को सूचना दी। कपकोट पुलिस और एसडीआरएफ की टीम को शव लेने सुंदरढूंगा भेजा जा रहा है।
सुंदरढूंगा में लापता गाइड को खोजने के लिए कई बार ग्रामीणों ने प्रयास किया लेकिन बर्फबारी अधिक होने के कारण पिछले आठ महीने में सभी प्रयास निष्फल साबित हुए। माउंट दुर्गाकोट अभियान पर आए सेना के दल ने भी देवीकुंड ग्लेशियर के आसपास गाइड को खोजने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। ग्लेशियर में बर्फ कम होने के कारण खिलाफ के बड़े भाई आनंद सिंह दानू और ग्रामीण पिछले महीने भी गाइड की खोज करने गए। तीन-चार दिन पहले फिर से ग्रामीणों की टीम सुंदरढूंगा गई थी। साथ में खिलाफ के साथ गए पोर्टर भी गए। टीम ने देवीकुंड ग्लेशियर और भनार के आसपास खोजबीन की।
भनार के पास उन्हें खिलाफ का शव मिला जिसकी सूचना टीम ने वॉकी टॉकी के माध्यम से ग्रामीणों को दी। ग्रामीण दिनेश सिंह ने बताया कि खिलाफ के बड़े भाई आनंद सिंह दानू की सूचना के आधार पर तहसील प्रशासन को जानकारी दे दी गई है। इधर, जानकारी मिलने के बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीम को सुंदरढूंगा के लिए रवाना होना था लेकिन सड़कों के बंद होने से वे नहीं जा सके हैं।
ग्रामीणों ने सुंदरढूंगा में गाइड के शव दिखने की सूचना दी है। एसडीआरएफ और पुलिस की टीम को भेजा जा रहा है। टीम शव को लेकर आएगी, उसके बाद ही शव को लेकर सही जानकारी मिल पाएगी।
पारितोष वर्मा, एसडीएम कपकोट
पिछले साल 18 अक्तूबर से लापता थे खिलाफ
बागेश्वर। पिछले वर्ष 12 अक्तूबर को पश्चिम बंगाल से आए पांच ट्रैकरों को लेकर वाछम गांव के जैंकुनी तोक निवासी गाइड खिलाफ सिंह दानू (35) और चार पोर्टर सुरेश सिंह दानू, तारा सिंह दानू, विनोद सिंह दानू और कैलाश सिंह दानू सुंदरढूंगा रवाना हुए थे।
पोर्टर सुरेश सिंह दानू के अनुसार 17 अक्तूबर को दल जांतोली, कठलिया, मैकतोली, बैलूनी टॉप होते हुए भनार पहुंचा। उस दिन मौसम काफी खराब हो गया था। शाम को करीब साढ़े चार बजे से बर्फबारी शुरू हो गई। 18 अक्तूबर को दल ने कनकटा पास की ओर कदम बढ़ाए तभी भारी बर्फबारी होने लगी। बर्फीला तूफान आने लगा। वे वापस कठलिया लौटने लगे। टेंट लगाने की व्यवस्था नहीं हो सकी। ठंड बढ़ने से भनार के पास एक बंगाली पर्यटक की हालत बिगड़ने लगी। उसके हाथ-पांव सुन्न पड़ गए। पोर्टरों ने उसे पानी पिलाया और पीठ में उठाकर नीचे की ओर लाने लगे। कुछ देर बाद पोर्टर भी थक गए। बर्फीला तूफान तेज होता रहा और सभी लोग जान बचाने की कोशिश करने लगे। गाइड ने चारों पोर्टरों से आगे चलने के लिए कहा और खुद ट्रैकरों को लेकर पीछे से आने लगे। चारों पोर्टर तो लौट आए लेकिन गाइड खिलाफ सिंह और पांचों बंगाली ट्रैकर वापस नहीं आ सके। 21 अक्तूबर से जिला प्रशासन ने बचाव और खोजबीन अभियान शुुरू किया। सेना के हेलीकॉप्टर से भी रेकी की गई लेकिन खराब मौसम बाधा बन गया। 23 अक्तूबर को एसडीआरफ और स्थानीय लोगों की टीम सुंदरढूंगा को रवाना हुई। 25 अक्तूबर को दल ने देवकुंड में पांच शव देखे जिन्हें 26 अक्तूबर को सेना के दो हेलिकॉप्टरों की मदद से कपकोट के केदारेश्वर मैदान में लाया गया था। हादसे में जान गंवाने वाले बंगाली ट्रैकर पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सागर डे, चंद्रशेखर दास, सरित शेखर दास, नदिया राजघाट निवासी प्रीतम राय और कोलकाता के बिहाला निवासी सादान बसाक थे।