बागेश्वर के सरयू नदी में मछलियों की ताक में बैठे जलकाग। विज्ञप्ति
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बागेश्वर। सर्दियां शुरूहोते ही प्रवासी परिंदों का पहाड़ों की ओर आने का सिलसिला शुरू हो गया है। इन दिनों बागेश्वर में भी प्रवासी पक्षी जलकाग आने लगे हैं। नगर के सरयू नदी में सुबह के समय प्रवासी पक्षियों का झुंड दिखाई दे रहा है।
जलकाग को कॉरमोरेंट और पनकौआ के नाम से भी जाना जाता है। रूस, साइबेरिया, थाइलैंड, कंबोडिया के अलावा भारत में भी यह पक्षी बहुतायत में पाया जाता है। देश के तिब्बत के पठार आदि स्थानों के साथ-साथ समुद्र तटीय स्थानों में भी यह निवास करते हैं।
जिले में सर्दियों का मौसम शुरू होने के बाद इनकी आवक होने लगती है। नगर के सरयू तट पर इन दिनों प्रवासी पक्षियों जलकाग का झुंड विचरण कर रहा है। सुबह के समय प्रवासी पक्षी नदी में गोता लगातार मछलियां पकड़ते हैं, तो कभी नदी के समानांतर उड़ान भरते देखे जा रहे हैं। प्रवासी पक्षी आमतौर पर पहाड़ों में नवंबर से आते हैं और मार्च तक रुकते हैं। हालांकि इस बार जलकाग कुछ पहले ही पहुंच गए हैं।
इधर, डीएफओ हिमांशु बागरी ने कहा कि जलकाग देश और विदेश में पाई जाने वाली पक्षियों की अहम प्रजाति है। जो सर्दियों में पहाड़ों का रुख करती हैं तो गर्मियों में अपने मूल स्थान को लौट जाती है। यह पक्षी मुख्यत: नदियों और समुद्रों के किनारे रहकर मछलियों का शिकार करते हैं। इनका पहाड़ों की ओर आना अच्छा संकेत है।