मौत का मुहाना बने गांवों में जी रहे हजारों लोग
बागेश्वर/कपकोट। जिले के तीन गांवों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की सरकार की कवायद से मौत का मुहाना बने घरों में जी रहे हजारों अन्य परिवारों में भी सुरक्षित विस्थापन की उम्मीद जगी है। बागेश्वर जिले में इस समय 62 ऐसे गांव हैं, जो आपदा की दृष्टि से संवेदनशील हैं।
बागेश्वर जिला आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। अधिक बारिश होने पर पहाड़ों में हर साल भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। बरसात शुरू होते ही आपदा प्रभावित गांवों के लोग मकानों के जमींदोज होने के खतरों के डर से जागते हुए रातें गुजारते हैं। अधिक बारिश होने पर प्रशासन द्वारा भी खतरे में आने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया जाता है।
इनसेट
यह गांव हैं अति संवेदनशील
कुंवारी, सूपी, सेरी, दोबाड़, बड़ेत, हरसिंग्याबगड़, बूरमोला, बामनखेत, नौकुड़ी, शीरी, शामा, रमाड़ी, कनौली, नामतीचेटाबगड़, खेती किसमिला, भनार, माजखेत, चुचेर, लाथी, लीती, हमटीकापड़ी, रातिरकेठी, मल्खाडुंगर्चा, गोगिना, रिठकुला, झूनी, खलझूनी, कर्मी, बघर, सरण, बदियाकोट, खर्ककानातोली, लोहारखेत, सनगाड़, खाती, बड़ी पन्याली, रीमा और बाछम।
यह गांव हैं संवेदनशील
गरुड़ ब्लॉक में जिनखोला, मटेना, कौसानी, पय्यां और कुलांऊ।
इनसेट
यह गांव हैं मध्यम संवेदनशील
कपकोट ब्लॉक के फरसाली, दुलम, सूडिंग, सौंग, फुलवारी, गुलेर, सलिंग, हरसीला, उतरौड़ा, गुलम परगड़, झोपड़ा, माजखेत, रैंथल, बस्कूना, असौं, बागेश्वर ब्लॉक के कफलखेत, ठाकुरद्वारा और कठायतबाड़ा।