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हिंदुस्तान के 'अंतिम' गांव के लिए रास्ता खुला

Mon, 30 Sep 2013 11:39 AM IST
अमर उजाला, जोशीमठ (चमोली)
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उत्तराखंड आपदा के 105 दिन बाद सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने माणा तक बदरीनाथ हाईवे खोल दिया है। माणा भारत-चीन सीमा पर हिंदुस्तान का अंतिम गांव है। इसके बाद सोमवार को मार्ग समतलीकरण के बाद छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए हरी झंडी मिल गई।
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हाईवे में अभी तक ऋषिकेश से विष्णुप्रयाग तक आवाजाही हो रही थी। विष्णुप्रयाग से यात्री जंगल के रास्ते किसी प्रकार बैनाकुली तक पहुंच रहे थे। बैनाकुली से बदरीनाथ तक सड़क पहले से ही खुली थी। आपदा के 105वें दिन रविवार को पूरा हाईवे खुल गया है।

वैली ब्रिज का निर्माण
बीआरओ के मेजर निकेश ने बताया कि मौसम ने साथ दिया तो सोमवार तक हाईवे पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। बीआरओ ने 30 सितंबर तक हाईवे को खोलने का दावा किया था। विष्णुप्रयाग में दो दिन पहले ही वैली ब्रिज का निर्माण किया गया। उसके बाद जेसीबी बदरीनाथ की ओर भेजी गई। यहां आधा किमी की हिल कटिंग के बाद हाईवे को सुचारु कर दिया गया है। अब विष्णुप्रयाग से बैनाकुली तक मार्ग का समतलीकरण कार्य किया जा रहा है। यह कार्य भी सोमवार शाम तक पूरा हो जाएगा।
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तीर्थयात्रियों का जमावड़ा लगना शुरू
बीआरओ के कमांडर कर्नल निलेश चंदाराना ने बताया कि हाईवे पर फिलहाल छोटे वाहनों की आवाजाही कराई जाएगी। इधर, हाईवे  खुलने की सूचना पर जोशीमठ में तीर्थयात्रियों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। इनमें अधिकतर वे तीर्थयात्री हैं, जिनके वाहन धाम में फंसे हैं। तीर्थयात्री जोशीमठ से डीजल और पेट्रोल के केन लेकर बदरीनाथ जाने की तैयारी कर रहे हैं।

दिल्ली से जोशीमठ पहुंचे सुबोध शर्मा का कहना है कि वे 15 जून को बदरीनाथ पहुंचे थे, लेकिन जल प्रलय के बाद वे वाहन को धाम में छोड़कर वापस चले गए थे। अब मार्ग खुलने की सूचना मिलने पर फिर यहां पहुंचे हैं। वहीं, बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा के विधिवत शुरू होने की आस लगाए बैठे स्थानीय व्यापारियों में भी उत्साह है।
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