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बदरीनाथ धाम में फिर बढ़ी चहल-पहल

Sat, 16 Nov 2013 08:20 PM IST
अमर उजाला, जोशीमठ/गोपेश्वर
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बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि करीब आते ही धाम में फिर तीर्थयात्रियों की चहल-पहल बढ़ गई है। शनिवार को करीब 300 तीर्थयात्रियों और 230 स्थानीय श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ धाम में मत्था टेका। धाम के कपाट बंद होने के लिए मंदिर को फूलों से सजाया जा रहा है। धाम में शनिवार शाम को कई तीर्थयात्रियों को विशेष पूजा करवाई।
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18 को कपाट होंगे बंद
बदरीनाथ धाम के कपाट 18 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। अब तक गणेश मंदिर, आदिकेदारेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने के साथ ही शनिवार को वेद ऋचाओं का वाचन भी बंद कर दिया गया है। शनिवार को अपने परिवार के साथ धाम पहुंचे विद्यादत्त तिवारी का कहना है कि वे प्रति वर्ष बदरीनाथ धाम में मत्था टेकने पहुंचते हैं।

इस वर्ष आपदा के कारण कपाट बंद होने के दौरान धाम पहुंचे हैं। रुद्रप्रयाग निवासी रेखा नेगी का कहना है कि वह छह माह से अस्वस्थ होने से बदरीनाथ नहीं जा पाई। अब तबियत ठीक होने पर अपने अन्य साथियों के साथ बदरीनाथ में मत्था टेकने पहुंची।बदरीनाथ धाम में कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है। शाम ढलते ही धाम में बर्फीली हवाएं चलने से दुश्वारियां बढ़ गई हैं। यहां रह रहे व्यापारियों ने भी सामान समेटना शुरू कर दिया है।
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बदरी धाम में वेद ऋचाओं का वाचन बंद
छह माह से वेद ऋचाओं से गुंजायमान श्री बदरीनाथ धाम में शनिवार से वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो गया है। तड़के से ही वेद पुस्तक, खड़ग पुस्तक और भागवत पुराण की पुस्तकें श्री बदरीनाथ धाम के गर्भगृह में रखी गई। देर शाम पूजा-अर्चना के साथ पुस्तकें छह माह तक के लिए बंद कर दी गई। अब 18 नवंबर तक बदरी विशाल की पूजा वेद ऋचाओं के बिना ही होगी। शनिवार को तड़के बदरीनाथ का श्रृंगार और अभिषेक किया गया। रावल केशवन नंबूदरी ने पूजाएं संपन्न की।

धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने वेद ऋचाओं का वाचन किया। दोपहर बाद बदरीनाथ में वेद पुस्तकों को छह माह तक के लिए बदरीनाथ गर्भगृह में रख दिया गया। अब आगामी वर्ष धाम के कपाट खुलने के बाद ही धाम में वेद ऋचाओं का वाचन शुरू होगा। रविवार को बदरीनाथ मंदिर परिक्रमा स्थल में स्थित लक्ष्मी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कड़ाई भोग का आयोजन किया जाएगा।
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