विश्व विख्यात पर्वतारोही और पहली महिला एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल के दक्षिणी ध्रुव अभियान की ‘बलि’ भी ‘रुपये’ ने ले ली है।
बीते साल नवंबर में बछेंद्री का विश्व की अन्य छह चुनिंदा पर्वतारोहियों के साथ दक्षिणी ध्रुव का अभियान तय था।
इसके लिए लगातार दो साल तक उन्होंने नार्वे में हाड़-तोड़ प्रशिक्षण भी लिया, लेकिन बीते साल यूरोप में मंदी की वजह से स्पांसर ने अभियान से हाथ खींच लिए।
12 करोड़ रुपये की जरूरत
अभियान के लिए 12 करोड़ रुपये की जरूरत थी। बछेंद्री और अन्य पर्वतारोहियों के खाते में टाटा स्टील के मार्फत केवल ढाई करोड़ रुपये ही पहुंचे।
इस साल फिर से अभियान का ख्वाब संजो रहीं इन पर्वतारोहियों को रुपये की कमजोरी ने धक्का पहुंचा दिया है। इसके चलते भारतीय स्पांसर भी साथ नहीं। ख्वाब टूटते देख भी पहाड़जैसे हौसले वाली यह पर्वतारोही निराश नहीं।
दक्षिणी ध्रुव अभियान की थीम ‘एक्सेस आफ फ्रेश वाटर’ थी, जिस पर अब बछेंद्री अपनी सहयोगियों के साथ उत्तराखंड से अभियान शुरू करेंगी।
गोमुख से हरिद्वार तक होगा ट्रैक
बछेंद्री पाल के साथ अभियान के अंतर्गत नार्थ अमेरिका, साउथ अमेरिका समेत यूरोप की पर्वतारोही गोमुख से हरिद्वार तक ट्रैक करेंगी। इस ट्रैक का उद्देश्य 50 हजार बच्चों को पानी की महत्ता बताना और उन्हें पानी, नदी को बचाने का संदेश देना होगा। सितंबर, 2014 में प्रस्तावित इस अभियान की जिम्मेदारी टाटा स्टील लेगा। बछ्रेंद्री इसकी जमशेदपुर इकाई में कार्यरत हैं।
बछेंद्री बोलीं, बच्चों को जोड़ेंगे
अभियान के माध्यम से कोशिश रहेगी कि उत्तराखंड में पानी की बर्बादी को रोका जाए। अभी पानी की जो स्थिति है, उसमें यह बात निर्मूल नहीं लगती कि कभी पानी के लिए जंग भी हो सकती है। हम बच्चों को अपने साथ जोड़ेंगे।