यौन उत्पीड़न के आरोप में जेल में बंद आसाराम का टिहरी से विशेष जुड़ाव रहा है। यहां इनके सी ब्लॉक, चवालखेत और आमपाटा में आश्रम हैं।
सी ब्लॉक में 300 वर्गमीटर जमीन पर स्थित आश्रम को जमीन दिए जाने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बताया गया कि नियमों को ताक पर रखकर टीएचडीसी के एक अधिकारी ने विस्थापितों को दी जानी वाली 300 वर्गमीटर जमीन आसाराम के ट्रस्ट को वर्ष 1998 में दे दी थी।
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स्थानीय निवासियों ने जमीन आवंटन का उस समय विरोध भी किया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुनर्वास निदेशालय के अधिकारी अब भी इस मामले में कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
आसाराम की गिरफ्तारी के बाद से उनके आश्रमों में सन्नाटा पसरा हुआ है। सी ब्लॉक आश्रम में दो, चवालखेत में चार और आमपाटा के आश्रम में केवल दो ही सेवादार हैं। आश्रमों के गेटों पर भी ताले लगे हुए हैं।
रातों रात दाननामा तैयार
बताया गया कि टीएचडीसी के एक प्रभावशाली अधिकारी ने वर्ष 1998-99 में नई टिहरी के सी ब्लॉक टाइप 3 के पास कर्मचारियों के आवासीय कालोनी में डेढ-डेढ सौ वर्ग मीटर के दो भूखंड एक स्थानीय व्यक्ति के नाम आवंटन कर आसाराम ट्रस्ट के नाम रातों रात दाननामा तैयार करा दिया था।
आंवटन के एक माह के अंदर ही आश्रम बना दिया गया था। टीएचडीसी के इस अधिकारी को आसाराम का साधक बताया जाता है।
सी ब्लॉक में ट्रस्ट को दी गई जमीन का प्रकरण पुराना है। नियम के अनुसार आंवटन हुआ है या नहीं इसकी जानकारी नहीं है। यदि कोई शिकायत करता है तो पत्रावलियों की जांच पड़ताल की जाएगी। गलत तरीके से जमीन का आवंटन किया गया होगा तो कार्रवाई की जाएगी।- आरके तिवारी, अधिशासी अभियंता पुनर्वास विभाग टिहरी
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