विवादों में फंसे आसाराम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उत्तराखंड में भी आसाराम के कई आश्रमों पर वन विभाग सहित प्रशासन की नजरें टेढ़ी हो रही हैं।
नए मामले में अब नई टिहरी में मुनिकीरेती के नीरगढ़ में वन भूमि पर बने आसाराम के आश्रम पर शिकंजा कसने के लिए वन विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है।
आश्रम स्थल की भूमि अपने कब्जे में लेने के लिए वन विभाग ने रेगुलर और राजस्व पुलिस से मदद मांगी है। अधिकारियों की मानें तो एक-दो दिन में वन भूमि पर अनाधिकृत तरीके से बने आश्रम को ध्वस्त कर लिया जाएगा।
16 सितंबर तक का समय था
आश्रम को हटाने के लिए वन विभाग ने विगत नौ सितंबर को आसाराम को अंतिम नोटिस जारी किया था। कब्जा हटाने के लिए आश्रम को 16 सितंबर तक का समय दिया गया था। निर्धारित तिथि बीतने के दो दिन बाद भी आश्रम को लेकर वन विभाग को कोई जवाब नहीं मिला है।
नीरगढ़ में 1950 में संत श्री त्यागी लक्ष्मण दास को कुटिया के लिए 0.232 हेक्टेयर भूमि 19 वर्ष के लिए लीज पर दी थी। 1969 में लीज समाप्त हो गई थी। वर्ष 1970 में लक्ष्मण दास ने लीज नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था लेकिन नवीनीकरण नहीं हो पाया था। लक्ष्मण दास ने पहले आसाराम को असली चेला बताते हुए वसीयत लिखकर उसे अपना वारिस बताया था जिसे बाद में खंडित कर राम सेवक दास का नाम दर्ज किया गया था।
आसाराम ने अपने को असली चेला बताया
वर्ष 2001 में लक्ष्मण दास की मृत्यु के बाद आसाराम ने अपने को असली चेला बताते हुए सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर किया था। वर्ष 2007 में सीजेएम कोर्ट से आसाराम के पक्ष में फैसला आने के बाद राम सेवक हाईकोर्ट में चला गया। दोनों के बीच आश्रम के स्वामित्व को लेकर उच्च न्यायालय में मामला चल रहा है। वन भूमि को अपने पजिशन में लेने के लिए वन विभाग तैयारी में जुट गया है। डीएम और एसपी को पत्र भेजकर वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने के दौरान सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है।
एक-दो दिन में अतिक्रमण पूरी तरह से हटा लिया जाएगा। इसके लिए आवश्यक तैयारी कर ली गई है। अतिक्रमण न हटाने को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं है।
-केशव प्रसाद रतूड़ी रेंज अधिकारी मुनिकीरेती