जलवायु में बदलाव के हिसाब से इंसान ही नहीं पेड़-पौधे भी खुद को ढालने लगे हैं। आमतौर पर चार से पांच हजार फीट की ऊंचाई में उगने वाले सेब, चीड़ जैसे पेड़ तराई-भाबर में भी पनपने लगे हैं।
उत्तराखंड के हल्द्वानी की अलकनंदा कालोनी में सेब का पेड़ आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करीब 15 फीट ऊंचा पेड़ सेबों से लदा है। इसका आकार और स्वाद भी सामान्य सेब की तरह है।
बागवानी के शौकीन उमेद सिंह बिष्ट ने घर के पास छोटा-सा बगीचा बनाया है। उन्होंने चार साल पहले इस बगीचे में डेलिसस वैरायटी के सेब का पौधा लगाया था। पेड़ में करीब चार सौ से अधिक सेब लगे हैं, जो अभी हरे हैं।
उमेद बताते हैं कि हल्द्वानी में सेब का पेड़ लगने और सेब से लदने की बात पर कोई यकीन ही नहीं कर रहा है।
दूसरी तरफ, तल्ली हल्द्वानी में पूर्व उप प्रधान गुलाब सिंह नेगी के बगीचे में 6 फीट मोटा और 50 फीट ऊंचा चीड़ का पेड़ खड़ा है। यह पेड़ देखकर भी लोग हैरत में पड़ जाते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी रामेश्वर सिंह हल्द्वानी में सेब के पेड़ में फल आने की बात पर यकीन नहीं करते।
उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते कुछ वनस्पतियों और पेड़-पौधों में बदलाव जरूर आया है लेकिन समुद्र तल से हल्द्वानी की ऊंचाई महज 1391 फीट है और तापमान भी काफी गरम है। ऐसे यहां सेब लगने की जानकारी सही नहीं लगती।
उनकी टीम बगीचे पहुंचकर सेब का पेड़ देखेगी। बात सही निकली तो इसमें शोध किया जाएगा।