अमरोहा। भारतीय किसान यूनियन की हरी टोपी लगाकर अफसरों पर रौब झाड़ना अब आसान नहीं होगा। दरअसल, संगठन ‘टोपी-डंडे’ की आड़ में लगातार खराब होती साख को लेकर फिक्रमंद हो गया है। भाकियू ने कोड आफ कंडक्ट जारी करते हुए दो टूक फैसला लिया है कि बेवजह और निजी स्वार्थ के लिए धरना प्रदर्शन करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। लिहाजा पकड़े जाने पर मुकदमा दर्ज कराने तक का निर्णय ले लिया गया है।
बताते चलें कि इन दिनों जिलाध्यक्ष के निधन के बाद से ही पद की भरपाई को लेकर यूनियन कम से कम जिले में तो बंटी हुई है। हालात यह हैं कि यदि सरकारी आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तब इन ग्यारह माह में 38 बार धरने प्रदर्शन हो चुके हैं। दस बार जाम और 15 से 18 बार अफसरों की घेराबंदी की जा चुकी है। अहम पहलू यह है कि मंडी धनौरा के फत्तेहपुर छीत्तरा गांव से संचालित संगठन और रजबपुर से कई स्वयंभू नेताओं ने आए दिन बिना विश्वास में लिए धरने प्रदर्शनों से शीर्ष नेताओं की नींद उड़ा रखी है।
बहरहाल, प्रशासनिक स्तर पर बढ़ती फजीहत के बाद यूनियन ने फैसला कर डाला कि हरी टोपी और डंडे के बल पर संगठन के संविधान की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। लिहाजा टोपी तभी लगाएंगे जब जिले का या फिर ब्लाक स्तर का पदाधिकारी साथ में रहेगा। धरना प्रदर्शन भी इन्हीं स्तरीय पदाधिकारियों की सहमति के बिना नहीं किए जाएंगे। प्रांतीय महासचिव चौ. दिवाकर सिंह के मुताबिक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौ. विजयपाल सिंह की अध्यक्षता में अनुशासनात्मक समिति ने ऐसे लोगों को चिन्हित करके प्रशासन के साथ एफआईआर कराने का फैसला भी किया है।