अल्मोड़ा धौलछीना-कफड़खान मार्ग की दुर्दशा। संवाद
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धौलछीना( अल्मोड़ा)। राज्य बने दो दशक बीत गए हैं इस बीच कई सरकारें आईं और गईं लेकिन किसी भी सरकार ने धौलछीना-कफड़खान मोटर मार्ग की दशा सुधारने का प्रयास नहीं किया। लगभग चार दशक पूर्व बनी इस सड़क में अब तक डामरीकरण नहीं हो सका है। लोनिवि की अनदेखी से यह मोटर मार्ग बदहाल होता जा रहा है।
धौलछीना-कफड़खान रोड का निर्माण करीब 40 वर्ष पूर्व हुआ था। तब से धार्मिक पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली इस महत्वपूर्ण रोड पर डामरीकरण नहीं किया जा सका है। धौलछीना से कफडखान (गैराड) तक 14 किलोमीटर लंबी यह सड़क निर्माण से अब तक डामरीकरण की बाट जोह रही है।
सड़क पर कई स्थानों पर बड़े बड़े गड्ढे हो गए हैं और बारिश होने पर इन स्थानों पर सड़क तालाब बन जाती है। कीचड़ से पटी सड़क पर दो पहिया और चौपहिया वाहनों का निकलना मुश्किल हो रहा है। पूर्व में इस सड़क में प्रथम और द्वितीय चरण की सोलिंग तो की गई है मगर डामर नहीं होने से सड़क की हालत खराब होते जा रही है।
इससे धौलछीना से बिनसर, बागेश्वर और गैराड मंदिर आने जाने वाले यात्रियों और पर्यटकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह सड़क अल्मोड़ा, चितई, बाड़ेछीना, धौलछीना मार्ग का विकल्प भी है। सड़क पर डामरीकरण होने और सुचारु यातायात होने पर जिला मुख्यालय अल्मोड़ा से धौलछीना तक लगभग आठ किलोमीटर दूरी कम हो जाएगी। स्थानीय लोगों की ओर से कई बार लोनिवि और प्रशासन से इस मार्ग पर डामरीकरण कराए जाने की गुहार लगाई जा चुकी है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
मुख्यमंत्री दरबार तक भी पहुंच चुका है मामला।
धौलछीना। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष गोविंद सिंह पिलख्वाल ने फरवरी 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर सड़क पर डामरीकरण कराए जाने की मांग की थी। इस पर सीएम ने मुख्य अभियंता लोनिवि को त्वरित कार्यवाही के निर्देश भी दिए लेकिन यह आदेश भी फाइलों के ठंडे बस्ते में चला गया है। संवाद