अल्मोड़ा। ड्रग कंट्रोलर के आदेश से जिला और प्रदेश में रिटेल और होल सेल दोनों स्तर पर नारकोटिक, सायकोट्रोपिक दवाओं की किल्लत शुरू हो गई है। अधिकतर व्यापारियों ने इस आदेश के अंतर्गत आने वाली दवाओं का स्टॉक वापस भेजना शुरू कर दिया है। इन दवाओं का इस्तेमाल मनोचिकित्सक और फिजिशयन की ओर से मरीजों के रोजमर्रा के उपचार में किया जाता है।
उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ के अध्यक्ष बीएस मनकोटी और महामंत्री अमित गर्ग ने बताया कि ड्रग कंट्रोलर के आदेश से जिले और प्रदेश स्तर पर रिटेल और थोक दोनों स्तर पर दवाओं की किल्लत शुरू हो गई है। ये सभी दवाएं मनोचिकित्सक के अलावा बीपी, दिल, पेट और अन्य बीमारियों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है।
आदेशानुसार 15 दवाओं की न्यूनतम मात्रा रखने के अलावा उनका ब्योरा रखने की अनिवार्यता के साथ हर माह की पांच तारीख को ड्रग कंट्रोल विभाग को सभी सूचना भेजना भी अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि अधिकांश व्यापारियों ने इस आदेश के अंतर्गत आने वाली दवाओं का स्टॉक वापस भेजना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि दवाओं कि इतनी कम मात्रा से मरीजों का इलाज कर पाना असंभव होगा। उन्होंने उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आदेश में शिथिलता देने की मांग की है।
उपरोक्त दवाओं का संकट होने का प्रकरण संज्ञान में नहीं आया है। इसकी पुष्टि के ड्रग इंस्पेक्टर से बात की तो उन्होंने बताया है कि अभी दवाओं की कमी नहीं है। जैसे ही कोई दिशा निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार काम किया जाएगा।
डॉ. आरसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा