जैनोली में सिर पर पानी ढोकर लाते बच्चे। संवाद
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत के गांवों में पानी का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। फल्दाकोट पट्टी के अंतर्गत धूराफाट, चौगांव सहित तमाम इलाकों में ग्रामीण चार से पांच किमी की दूरी से पानी ढोने को विवश हो रहे हैं। इन दिनों बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं, बच्चों का पूरा समय पानी जुटाने में व्यतीत हो रहा है। बीडीसी सदस्य त्रिभुवन फर्त्याल ने कहा कि पानी की समस्या दूर नहीं हुई तो वह स्वयं जल संस्थान कार्यालय पर धरने पर बैठेंगे।
दरअसल, चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत यह गांव जुड़े हुए हैं, लेकिन वर्षों बाद भी यह योजना जल संस्थान को हैंडओवर नहीं हुई है। दोनों विभाग एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं।
जल, जीवन, मिशन योजना के तहत कुछ माह पहले इन गांवों में पेयजल लाइनों में काम हुए थे। ग्रामीणों का कहना है कि कार्य में कई व्यावहारिक दिक्कतें हैं। इसलिए गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा है। जैनोली सहित तमाम गांवों में चिलियानौला पेयजल पंपिंग योजना से सात से आठ दिन में पानी पहुंच रहा है वह भी पर्याप्त नहीं। जिस कारण भारी परेशानी हो रही है। बच्चों के पेपर चल रहे हैं और उनका सारा समय पानी जुटाने में लगता है।
बीडीसी सदस्य त्रिभुवन फर्त्याल ने बताया कि जल संस्थान और जल निगम एक दूसरे के ऊपर दोषारोपण कर रहे हैं जबकि योजना का हस्तांतरण दो साल पहले हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जल, जीवन मिशन के तहत 206 संयोजन वितरित किए हुए हैं। लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं है। जिम्मेदार अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। इधर, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता सुरेश ठाकुर ने कहा कि योजना का हस्तांतरण जीएम स्तर से होगा। किल्लत वाले क्षेत्रों की दिक्कतों को दूर किया जाएगा।