उर्स समारोह में भाग लेने पहुंचे लोग। संवाद
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। कोरोना महामारी के कारण दो साल से बंद पड़ा कौमी एकता का प्रतीक उर्स समारोह कुरान ख्वानी के साथ शुरू हो गया है। कालू सैयद बाबा की मजार पर कुरान पाठ हुआ और देर शाम तकरीर हुई। इधर, बाहर से आए व्यापारियों ने वहां दुकानें सजा ली हैं। गंगा जमुनी तहजीब के लिए प्रसिद्ध इस समारोह में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से जायरीन पहुंचने लगे हैं। बृहस्पतिवार की देर शाम नगरवासियों की तरफ से सामूहिक चादर चढ़ाई जाएगी।
महामारी के करण पिछले दो सालों से उर्स प्रतीकात्मक रूप से मनाया जा रहा था। इस बार 48वें उर्स समारोह की शुरूआत हो गई है। चार दिनी इस समारोह की शुरूआत कुरान ख्वानी के साथ हुई। बाबा की मजार से सुभाष चौक तक का इलाका फूल मालाओं से सजाया गया है। स्थानीय और बाहरी व्यापारियों ने वहां दुकानें सजा दी हैं। खरीदारी करने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचने लगे हैं। बता दें कि कालू सैयद बाबा में मुस्लिम ही नहीं वरन सभी धर्मों के लोगों की अगाध श्रद्धा है। यहां प्रतिदिन चादर चढ़ाने का सिलसिला चलता है। देर रात देशभर के राज्यों से आए नामी कव्वाल अपने फन का जादू बिखेरते हैं। बृहस्पतिवार की शाम सात बजे गिलाफ ख्वानी होगी, जिसके तहत पूरे क्षेत्र की जनता की ओर से मजार पर चादर चढ़ाई जाएगी। 27 मई की रात नौ बजे से वहां कव्वालियों का दौर शुरू होगा। उर्स को लेकर लोगों में भी उत्साह का माहौल है।