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चार साल बाद भी नहीं हो सका तिपौला पेयजल पंपिंग योजना का हस्तांतरण

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कुमाऊं में पेयजल संकट। संवाद
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। वर्षों से एकमात्र ताड़ीखेत-गगास पेयजल पंपिंग योजना पर निर्भर ग्रामीणों के लिए वर्ष 2018 में बनी चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल योजना का हस्तांतरण नहीं हो सका है। इस योजना से ताड़ीखेत विकासखंड की 28 ग्राम पंचायतें जुड़ी हैं। हालांकि जल संस्थान इससे पानी बांटता है, लेकिन पर्याप्त आपूर्ति न हो पाने की शिकायतें कई बार आतीं हैं। जल संस्थान ने जहां योजना की डिजाइन पर सवाल उठाया है तो वहीं जल निगम का कहना है कि योजना पूरी तरह से ठीक है।
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गगास-ताड़ीखेत पेयजल योजना वर्ष 1973 में बनी थी। इस योजना से सेना के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में पानी बंटता था, आए दिन पानी की किल्लत से ग्रामीण परेशान रहते थे। वर्ष 2013 में चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल पंपिंग योजना की घोषणा हुई। करीब 21 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस योजना से 28 ग्राम पंचायतों को लाभ दिया गया लेकिन योजना का चार साल बाद भी हस्तांतरण नहीं हो सका है। जल निगम ने योजना बनाई पंपिंग कर जल संस्थान को देती है। इसके बावजूद पानी की किल्लत रहती है।
जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि योजना से मात्र पांच घंटे की पंपिंग हो रही है, पानी कम मिलने से गांवों में पर्याप्त आपूर्ति में दिक्कतें आतीं हैं। कम से कम 16 घंटे की पंपिंग होगी तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था हो जाएगी। कहा कि हैडरों में पुराने संयोजनों को नहीं जोड़ा गया है। जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि योजना में कोई खामी नहीं है, आठ घंटे पंपिंग की जा रही है। बिजली की आपूर्ति में कुछ बाधा आती है।
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इसके आगणन में हैडर बनाने की बात नहीं थी, फिर भी ढाई लाख रुपये से चिलियानौला में 23 हैडर बनाए हैं। संयोजन भी जोड़ दिए जाएंगे। योजना हस्तांतरित करने के लिए वर्ष 2018 से प्रयास किए जा रहे हैं।
योजना के आई वैल में तकनीकी खामी है। जब नदी आती है तो गंदा पानी निकलता है। मात्र पांच घंटे की पंपिंग हो रही है जबकि 16 घंटे पंपिंग होनी चाहिए। पंपिंग योजना मेरे स्तर से हस्तांतरित नहीं होगी, यह जीएम स्तर का मामला है। वहां से हस्तांतरित करने की कार्रवाई शुरू हो गई है।
-सुरेश ठाकुर, ईई, जल संस्थान, रानीखेत।
योजना में कोई दिक्कत नहीं है। हर बार नए बहाने बना दिए जाते हैं। हैडर बन चुके हैं। कनेक्शन भी शिफ्ट कर दिए जाएंगे। आठ घंटे की पंपिंग कर रहे हैं। आईवैल भी ठीक बना है। हम वर्ष 2018 से ही योजना को हस्तांतरित करने की बात कह रहे हैं। इसके बावजूद हस्तांतरित करने की कार्रवाई नहीं हो रही है।
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-पंकज कुमार, जेई, जल निगम, रानीखेत।
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