ताड़ीखेत कस्बे में इस तरह से होता है कूड़े का निस्तारण। संवाद
- फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। पहाड़ के कसबों में सफाई व्यवस्था के हाल बुरे हैं। ऐतिहासिक ताड़ीखेत और पर्यटन की दृष्टि से बेहद सुंदर मजखाली में भी कूड़ा निपटान की व्यवस्था नहीं होने से जहां स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लग रहा है, वहीं पहाड़ स्वच्छता सर्वेक्षण में भी लगातार पिछड़ रहे हैं। हालांकि कैंट बोर्ड और नगरपालिका क्षेत्रों में सफाई की अच्छी व्यवस्था है। चिलियानौला और कैंट बोर्ड के कूड़े का निपटान संयुक्त रूप से कैंट के ही ट्रंचिंग ग्राउंड में होता है।
स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र बिंदु रहे ताड़ीखेत कस्बे में जगह-जगह कूड़े के ढेर स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगा रहे हैं। यहां अभी तक व्यवस्था ही नहीं हो सकी है। दूसरी तरफ मजखाली कस्बे में कुछ वर्ष पहले तक एक एनजीओ हफ्ते में एक बार कूड़ा उठाता था, लेकिन अब वह भी पूरी तरह से बंद हो चुका है। लोग जहां-तहां कूड़ा बिखेर देते हैं। जगह-जगह फैले कूड़े के ढेर दुर्गंध फैला रहे हैं। ताड़ीखेत ब्लॉक मुख्यालय में सबसे बड़ी समस्या कूड़े की है। निपटान की व्यवस्था नहीं होने से जगह-जगह कूड़े के ढेर पड़े रहते हैं। हालांकि कस्बे के लोग और व्यापारी आपसी सहयोग कर साफ सफाई करते रहते हैं।
कैंट और पालिका में अब नहीं दिखते कूड़े के ढेर
रानीखेत। छावनी परिषद और नगर पालिका चिलियानौला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था अब पटरी पर आ गई है। यहां सुबह डोर टू डोर कूड़े का नियमित उठान होता है। क्षेत्र के सार्वजनिक कूड़ादानों में कूड़े के ढेरों में भी 50 प्रतिशत तक कमी आई है। हालांकि ठेके पर दी गई सफाई व्यवस्था में पर्यावरण मित्रों की कमी से कई जगह सफाई संबंधी दिक्कतें अब भी बनी हुईं हैं।
कैंट बोर्ड के स्वच्छता निरीक्षक एपी सिंह ने बताया कि नि:शुल्क डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था के बाद सफाई व्यवस्था काफी मजबूत हुई है। सार्वजनिक कूड़ेदानों में 50 प्रतिशत तक कूड़ा कम हुआ है। नगर पालिका अध्यक्ष कल्पना देवी ने बताया कि सफाई व्यवस्था में सुधार हो गया है। नगरपालिका का कूड़ा भी छावनी परिषद के ट्रंचिंग ग्राउंड में जलता है। वहां वर्टिकल हाइड्रोलिक कंपेक्टर मशीन भी स्थापित है। पन्नियों का निपटान होता है। वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट की आवश्यकता है। बजट के अभाव में छावनी परिषद इस बार सर्वेक्षण अभियान में पीछे रह गई है।
- ताड़ीखेत क्षेत्र में कूड़ा निपटान पिटों के लिए राज्य वित्त से धनराशि रखवाई गई है। प्रस्ताव बनने के बाद कार्य शुरू होगा।-रवि सैनी, बीडीओ ताड़ीखेत।