कुमाऊं विवि नैनीताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, ड्रीलबिट सॉफ्टवेयर के जरिये साहित्यिक चोरी पर लगेगी लगाम
अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को अब अपने शोध अभिलेखों की जांच के लिए कुमाऊं विवि नैनीताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा को शोध अभिलेखों के जांच के अधिकार मिलने से शोधार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। ड्रीलबिट सॉफ्टवेयर के जरिये स्थानीय स्तर पर शोध अभिलेखों की जांच होगी और साहित्यिक चोरी भी पकड़ में आएगी।
सूचना और पुस्तकालय नेटवर्क (इनफ्लिबनेट) ने एसएसजे परिसर को शोध अभिलेखों के जांच के अधिकार दिए हैं। अब तक शोधार्थी अभिलेखों के जांच के लिए 60 किमी दूर कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल की दौड़ लगा रहे थे। अब ड्रीलबिट सॉफ्टवेयर के जरिये अभिलेखों की जांच के बाद शोधार्थी को पुस्तकालय प्रबंधन प्रमाण पत्र देगा, इससे उनकी अन्य विवि पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।
इंटरनेट ने बढ़ी साहित्यिक चोरी की घटनाएं
अल्मोड़ा। संचार क्रांति में विकास के साथ साहित्यिक चोरी की घटना में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ड्रीलबिट सॉफ्टवेयर के जरीए शोधार्थियों के अभिलेखों की जांच की जाएगी। सॉफ्टवेयर से उनके अभिलेखों की सत्यता की जांच होने के साथ ही साहित्यिक चोरी पर भी लगाम लगेगी।
कोट-शोधार्थियों को अभिलेखों की जांच की सुविधा एसएसजे परिसर के पुस्तकालय में मिल सकेगी। ड्रीलबिट सॉफ्टवेयर के जरीए शोधार्थियों के शोध अभिलेखों की जांच होगी।
डॉ. राकेश पंत, असिस्टेंट लाइब्रेरियन, एसएसजे पुस्तकालय, अल्मोड़ा।
फोटो - 03 एलएलएम 11 पी - एसएसजे परिसर अल्मोड़ा का पुस्तकालय। संवाद