फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दो साल बाद बच्चे देखेंगे स्कूल की दुनिया

विज्ञापन
हेमा कांडपाल, प्रधानाचार्य महर्षि विद्या मंदिर नियर स्टेडियम अल्मोड़ा - फोटो : ALMORA
विज्ञापन
अल्मोड़ा। कोरोनाकाल के लंबे दौर के बाद अब स्कूल जाने का समय करीब आ गया है। अब बच्चों की स्कूल लाइफ पूरी तरह से बदली-बदली नजर आएगी। यानी दो गज दूरी के साथ बैठना, स्कूल में साथ-साथ न खेलना, टिफिन शेयर न करना, मास्क पहनना आदि बच्चों के लिए अलग अनुभव होगा। बच्चों के स्कूल लौटने के बाद स्कूलों में लंबे समय बाद रौनक लौटेगी।
विज्ञापन

नर्सरी, यूकेजी, एलकेजी के बच्चे अब अप्रैल से पहली बार अपने स्कूल जाएंगे। लंबे समय तक घरों पर रहने से बच्चों के सोने जागने और खेलने का कोई रूटीन नहीं रहा है। घर पर रहने के दौरान बच्चों का लंबा वक्त टीवी या मोबाइल स्क्रीन के सामने बीता है। ऑनलाइन पढ़ाई के बहाने कई बार बच्चों ने मोबाइल में गेम्स आदि भी खेले। इस वजह से बच्चों में सोशल इंटरेक्शन भी घटा है। लंबे समय घरों में रहने पर बच्चे बोर हुए पर उन्होंने खुद को इसी माहौल में ढाल लिया। अब जब स्कूल खुलने जा रहे हैं तो बच्चों को एक बार फिर स्कूल के महौल में ढलना होगा।
बच्चों को स्कूल के लिए ऐसे करें तैयार
अल्मोड़ा। शिक्षिका पुष्पा दुर्गापाल का कहना है कि अभिभावक बच्चों का मनोविज्ञान समझें। बच्चों को सुबह उठने से लेकर शाम तक स्कूल के टाइम टेबल के अनुसार तैयार करें। उन्हें स्कूल के दोस्तों के साथ फिर से अच्छे रिश्ते बनाने को प्रेरित करें। बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कोविड अनुरूप व्यवहार करना सिखाएं ताकि कोरोना के बाद क्लास रूम में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
विज्ञापन

क्या कहते हैं शिक्षक, स्कूल प्रबंधक
शिक्षक-शिक्षिकाओं को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्हें बताया गया है कि छोटे-छोटे बच्चों को किस तरह से कोविड नियमों का पालन कराना है। स्कूल में बच्चों के लिए खेल-खिलौनों का उचित प्रबंध किया जा रहा है।
- हेमा कांडपाल, प्रधानाचार्य महर्षि विद्या मंदिर नियर स्टेडियम अल्मोड़ा
स्कूल के कक्षा-कक्षों को सैनिटाइज किया जा रहा है। बच्चों को आकर्षिक करने के लिए स्कूल में खिलौनों का प्रबंध किया गया है। बच्चों को खेल-खेल में विभिन्न जानकारी दी जाएगी। बच्चों को स्कूल में अच्छा माहौल देने का प्रयास किया जाएगा।
- हिमानी डंगवाल, प्रधानाचार्य जीबीए प्राथमिक स्कूल खोल्टा अल्मोड़ा
बच्चों के लिए स्कूल का परिवेश नया होगा। इस परिवेश में उन्हें ढालने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। चूंकि बच्चे छोटे हैं इसलिए उन्हें खिलौने आदि से भी खेल-खेल में पढ़ाया जाएगा।
- संजना नयाल, शिक्षिका अल्मोड़ा
बच्चों के स्वागत के लिए उनकी क्लास को खूब सजाया गया है। बच्चों की पसंद की वस्तुएं वहां रखी गई है ताकि वह स्कूल आने के लिए आकर्षित हो सकें।
-आशा जोशी, शिक्षिका अल्मोड़ा
क्या कहते हैं अभिभावक
दो साल बाद बच्चों का स्कूल खुलने जा रहा है। बच्चे खुशी-खुशी स्कूल जाए इसके लिए हमने उनकी पसंद की ड्रेस ली है। बैग, वाटर बोतल, लंच बॉक्स सब उनकी पसंद का लिया है ताकि वह खुश रहे।
- पाना देवी, अभिभावक अल्मोड़ा
मेरा बच्चा स्कूल जाने में थोड़ा डर रहा था। फिर मैने उससे बोला कि वहां नए-नए दोस्त मिलेंगे तो वह खुशी-खुशी तैयार हो गया। उसकी पसंद के खिलौने आदि खरीद कर लाई हूं ताकि वह खुशी-खुशी स्कूल जाने को तैयर हो।
-प्रियंका कनवाल, अभिभावक अल्मोड़ा
मेरी छोटी बेटी है। उसे स्कूल जाने के लिए पूरी तरह से तैयार किया है। उसे बताया गया है कि स्कूल में क्या-क्या गतिविधियां होती है। स्कूल को लेकर बच्चों के मन में बैठा डर दूर किया है।
- तारा टम्टा, अभिभावक अल्मोड़ा
बच्चा पहली बार स्कूल जा रहा है। इसलिए वह तरह-तरह के सवाल करता है। उसे स्कूल और वहां की गतिविधियों के बारे में समझाते हैं कि वहां क्या-क्या काम मिलेगा।
- रेनू आर्या , अभिभावक अल्मोड़ा
निरंतरता और आत्मविश्वास को बढ़ाने पर दे रहे जोर
बागेश्वर। महामारी का प्रभाव कम होने के बाद विद्यालयों में ऑफलाइन शिक्षा शुरु हो गई है लेकिन लंबे समय से कक्षा में बैठने की आदत भुला चुके बच्चों को सामंजस्य बैठाने में दिक्कत हो रही है। अधिकांश बच्चों में निरंतरता और आत्मविश्वास की कमी देखी जा रही है जिसे दुरुस्त करने के लिए शिक्षक और अभिभावक मिलकर प्रयास कर रहे हैं।
कोट
बच्चों को उनकी क्षमता और निरंतरता के अनुसार पढ़ाया जा रहा है। विद्यार्थियों को मानसिक तनाव से बचाने और उनके ज्ञान को बढ़ाने के लिए के लिए कई व्यावहारिक गतिविधियां कराई जा रही हैं।
वंदना मटेला, शिक्षक, सेंट एडम्स पब्लिक स्कूल गरुड़
ऑफलाइन शिक्षण शुरू होने के बाद बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से मुक्ति मिल गई है, लेकिन हमें इस माध्यम को पूरी तरह से नकारना नहीं है।
केवलानंद जोशी, शिक्षक सेंट एडम्स पब्लिक स्कूल गरुड़
लंबे समय तक स्कूल बंद रहने के बाद बच्चों को ऑफलाइन पढ़ने में कुछ दिक्कत हो रही थी। शिक्षकों की सलाह के बाद बच्चों को घर पर भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।
शोभा नेगी, अभिभावक गरुड़
स्कूल प्रबंधन, शिक्षक और परिवार वालों के संयुक्त प्रयासों से शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौट रही है। बच्चों का खोया आत्मविश्वास भी धीरे-धीरे लौटने लगा है।
विज्ञापन

मंजू जोशी, अभिभावक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें