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टॉफी, चाकलेट देकर बच्चों के मन से टीके का का डर निकाल रहे शिक्षक,

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इंस्पिरेशन पब्लिक स्कूल में टीका लगाते बच्चे। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। स्कूलों में 12 से 14 साल के बच्चों के लिए चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए स्कूल प्रबंधन भी बच्चों को पूरी तरह से प्रोत्साहित कर रहे हैं। कहीं बच्चों को टीका लगाने के बाद आधे घंटे खेलने की छुट्टी दी जा रही है तो कहीं टॉफी और चाकलेट देकर उनके मन से टीके का डर निकाला जा रहा है।
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जिले में स्वास्थ्य विभाग ने 12 से 14 साल के 20 हजार बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा है। अब तक स्वास्थ्य विभाग आठ हजार बच्चों को कोरोना का टीका लगा चुका है। बच्चों को टीका लगाने के लिए उनके अभिभावक उन्हें प्रेरित कर रहे हैं लेकिन स्कूल प्रबंधन और स्कूल के शिक्षक भी टीकाकरण अभियान को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए हर प्रयास कर रहे हैँ। स्कूलों में बच्चों को टीका लगाने और टीका का डर उनके मन से निकालने के लिए अलग-अलग तरह से प्रेरित किया जा रहा है।
क्या कहते हैं अभिभावक, बच्चे और शिक्षक
टीका लगाने के बाद अब हम बिना किसी डर के स्कूल जा सकते हैं शिक्षकों ने हमें समझाया है कि टीका लगने के बाद भी सावधानी बरतने की जरूरत है।
- शिवांगी शैली, छात्रा, फोटो।
टीका लगाने से पहले डर लगा था लेकिन टीका लगाने के बाद डर गायब हो गया। अब हम आगे दूसरा टीका लगाने के लिए भी तैयार है। अपने दोस्तों को भी टीका लगाने के लिए कह रहे हैं।
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- दीप्ति पालीवाल, छात्रा,
कोरोना के कारण हम लंबे समय तक घर में रहे, स्कूल भी बंद थे। फिर स्कूल आने लगे लेकिन कोरोना से डर तब भी लग रहा था। अब टीका लग गया है तो स्कूल आने में कोई डर नहीं है।
- सौरभ मेहता, छात्र,
मम्मी पापा ने बताया था कि टीका लगाने से ही टीके से बचा जा सकता है। इससे पहले ही खुद को टीका लगाने के लिए तैयार कर लिया था।
- अभिषेक शर्मा, छात्र,
जब पता चला कि स्कूल में टीका लगना है तो स्कूल जाने से पहले सुबह बच्चा थोड़ा रोया था। फिर उसे समझाया जिसके बाद वह तैयार हो गया। बच्चे को टीका लगाने से हम बेहद खुश हैं।
- विमला मेहरा, अभिभावक,
मेरे परिवार के बढ़े सदस्यों ने पहले ही टीका लगा लिया था। बच्चों को टीका लगाने का इंतजार था। अब बच्चों को भी टीका लगने से परिवार की कोरोना को लेकर चिंता समाप्त हो गई है।
- भगवती आर्या, अभिभावक
बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान चलाना सरकार और स्वास्थ्य विभाग की बेहतरीन पहल है। टीकाकरण के लिए स्कूल पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम का पूरा सहयोग मिला।
- पार्वती बिष्ट, शिक्षिका,
बच्चों को प्रोत्साहन देने के लिए उन्हें स्कूल की तरफ से टॉफी और चाकलेट बांटी गई। हम शिक्षक सभी अभिभावकों से अपील करते हैं कि बच्चों का टीकाकरण जरूर करें।
- चारु तिवारी प्रबंधक, न्यू इंस्पिरेशन पब्लिक स्कूल शैल, अल्मोड़ा,
54 की उम्र में मीलों चलकर पहना रहीं सुरक्षा कवच
शंकर पांडेय
बागेश्वर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए चलाए गए टीकाकरण अभियान को जिले में व्यापक सफलता मिली है तो इसके पीछे भवानी देव जैसे कर्मठ और जुझारू कर्मचारियों का अहम योगदान रहा। एएनएम भवानी ने बढ़ती उम्र के बावजूद जिस उत्साह और जोश के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है वह काबिल-ए-तारीफ है। 54 वर्ष की उम्र में तीन-तीन एएनएम सेंटर का कामकाज संभाल रही भवानी ने टीकाकरण के लिए मीलों की दूरी पैदल तय की है। बुजुर्गों के टीकाकरण से लेकर बच्चों को टीका लगाने तक वह पूरी शिद्दत से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं।
एएनएम भवानी देव बागेश्वर जिले के दूरस्थ गांव बदियाकोट के एएनएम सेंटर में पिछले 18 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रही हैं। पिछले 10 वर्षों से उनके पास बोरबलड़ा और कुंवारी एएनएस केंद्र की जिम्मेदारी भी है। वह बारी-बारी से तीनों केंद्रों का सफल संचालन कर रही हैं। कोविड काल से उनकी जिम्मेदारियां अधिक बढ़ गई हैं, जिन्हें वह गांव की आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से संभाल रही हैं। पिछले वर्ष 16 जनवरी से शुरू हुए कोविड टीकाकरण अभियान के बाद से वह लगातार तीन गांवों में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम में व्यस्त रही हैं।
टीकाकरण के लिए उन्हें बदियाकोट से कुंवारी तक 12 किमी और बदियाकोट से बोरबलड़ा तक 15 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। उन्हें बदियाकोट में तैनात स्टाफ नर्स ललित भाटिया, बोरबलड़ा की आशा कार्यकर्ता विमला देवी और कुंवारी की आशा कमला देवी का भी सहयोग मिल रहा है। संवाद
ग्रामीणों को टीका लगाना नहीं रहा आसान
बागेश्वर। भवानी देव बताती हैं कि जिले के अंतिम गांवों बोरबलड़ा और कुंवारी में टीकाकरण कराना आसान नहीं रहा। ग्रामीणों को टीका लगाने के लिए राजी करना भी चुनौती थी। हालांकि उनके समझाने के बाद लोग टीका लगाने को राजी हुए। उन्होंने बताया कि तीनों गांवों में बुजुर्ग, युवा और किशोरों का टीकाकरण करने के बाद राइंका बदियाकोट में लगाए गए शिविर में 12 से 14 आयु वर्ग के 76 बच्चों का भी टीकाकरण किया जा चुका है। घर-घर जाकर टीका लगाने का काम अब भी चल रहा है। संवाद
उत्कृष्ट कार्य के लिए मिल चुका है राष्ट्रपति पुरस्कार
बागेश्वर। एएनएम भवानी देव को स्वास्थ्य विभाग में सेवा करते हुए 30 साल का समय हो गया है। उन्होंने अपनी सेवा की शुरुआत सल्ट से की थी। बाद में उनका तबादला कपकोट के कर्मी गांव में हो गया। बाद में उनकी तैनाती बदियाकोट में कर दी गई। लगातार दूरस्थ इलाकों में तैनात रहकर उन्होंने सराहनीय कार्य किए जिसके चलते उन्हें वर्ष 2012 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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