रानीखेत (अल्मोड़ा)। सब कुछ ठीक रहा तो पर्यटन नगरी की महत्वाकांक्षी बाईपास सड़क योजना शीघ्र अस्तित्व में आ जाएगी। साढ़े तीन दशकों से मिलान के अभाव में लटकी इस योजना के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत की घोषणा के बाद प्रथम चरण के लिए धनराशि मिल गई है।
मिलान भूमि छावनी परिषद के अधीन होने के कारण अब लोनिवि ने छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी से भूमि हस्तांतरण करने की स्वीकृति मांगी है। चार किमी सड़क बनने के बाद भूमि हस्तांतरण का अड़ंगा आने के चलते यह योजना लंबे समय से अधर में लटकी है।
नगर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से बाईपास सड़क परियोजना को 35 साल पहले मंजूरी मिली। उसी समय रायस्टेट के पास से लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से खनियां गांव होते हुए जालली-मासी मोड़ पर मिलाने की योजना बनी।
खनियां गांव, इंदिरा बस्ती, राजपुरा और किलकोट के लोगों के अलावा ऐरोली के ग्रामीणों को इससे लाभ मिलना है। करीब एक दशक बाद किलकोट तक चार किमी मार्ग बना। किलकोट के बाद डिग्री कॉलेज के पास मुख्य जालली बैंड स्थित सड़क पर इसका मिलान होना था।
बताया गया है कि मिलान भूमि छावनी परिषद की होने के कारण जमीन का हस्तांतरण नहीं हो पाया। लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता कुंदन लाल वर्मा ने बताया कि बाईपास सड़क के मिलान के लिए शासन से प्रथम चरण के तहत 13.59 लाख रुपये प्राप्त हो गए हैं। मिलान भूमि में छावनी परिषद की 0.72 हेक्टेयर भूमि आड़े आ रही है। इसके लिए छावनी परिषद को भूमि हस्तांतरण के लिए पत्र भेजा गया है।