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सड़कें तो काट दी लेकिन 15 साल बाद भी डामरीकरण, सुधारीकरण की सुध नहीं

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मदन पंत - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। क्षेत्र में विकास का हाल यहां के मार्ग बयान कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने के लिए सड़कें तो काट दी गई हैं लेकिन इनमें न ही सोलिंग करवाई गई है और न ही डामरीकरण करवाया गया है।
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प्रख्यात कैंसर रोग विशेषज्ञ पद्मश्री स्व. मोहन चंद्र पंत के गांव कुणकोली को जोड़ने वाली सड़क भी पिछले 15 सालों से बदहाली का दंश झेल रही है। सड़क जगह-जगह से खराब हो चुकी है। गुस्साए ग्रामीणों का कहना है कि बार बार आंदोलन और विभाग को पत्र लिखने के बावजूद डामरीकरण का कार्य नहीं हो रहा है। यदि शीघ्र डामरीकरण और सोलिंग का कार्य नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे। इस मार्ग का विस्तार करते हुए इसे शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट के पीपली गांव को जोड़ने वाली सड़क के साथ मिलान की मांग भी अधूरी है।
अम्याड़ी से कुणकोली के लिए वर्ष 2008 में कटान हुआ था। रधुलीपीपल इंटर कॉलेज समेत चलसिया पड़ोली, अम्याड़ी, कुणकोली, नौधर आदि गांव इस सड़क से जुड़े हैं लेकिन डामरीकरण नहीं होने से इसमें कीचड़ भरा है। मार्ग की दशा इतनी खराब है कि 108 एंबुलेंस तक गांव में नहीं पहुंच पाती है। हालांकि लोनिवि निर्माण खंड कई बार प्रस्ताव बदल बदलकर शासन को भेजती है, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
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-मोटर मार्ग की दशा सुधारने और इसे शहीद के गांव पीपली सड़क तक मिलान की मांग पर कुछ माह पूर्व आंदोलन भी किया गया था। अब तक मांग पूरी नहीं हुई है। इस मसले फिर से आंदोलन किया जाएगा।-कैलाश तिवारी, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रानीखेत।
-डामरीकरण के अभाव में सड़क बनने का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। 15 साल बाद भी डामरीकरण नहीं हो पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। बरसात में लोगों को भारी परेशानी होती है। डामरीकरण कर ग्रामीणों को सड़क का लाभ दिलाना चाहिए।- संजय पंत, कुणकोली।
-कुणकोली गांव को जोड़ने वाली सड़क की सुध नहीं ली जा रही है। यह सरकारों की कार्यप्रणाली को दर्शा रही है। डॉ. पंत जीवित होते तो इस मार्ग में डामरीकरण हो जाता। मार्ग के सुधारीकरण के लिए आंदोलन किया जाएगा।- मदन पंत, कुल पुरोहित, कुणकोली गांव।

कैलाश तिवारी- फोटो : RANIKHET

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