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यहां जलाभिषेक के लिए सुबह तीन बजे से लगानी पड़ती है श्रद्धालुओं को लाइन

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रानीखेत का पंचेश्वर महादेव मंदिर। संवाद - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत नगर का प्राचीन पंचेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा का केंद्र है। आजादी से पहले यह मंदिर बदरीनाथ धाम को जाने वाले तीर्थ यात्रियों का पड़ाव हुआ करता था। रात्रि विश्राम के बाद लोग यहीं से तीर्थ को पैदल निकलते थे। महाशिवरात्रि पर हर साल यहां समारोह का आयोजन होता है। जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं को सुबह तीन बजे से लाइन में लगना पड़ता है।
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यहां तमाम अवसरों पर शिवार्चन और जलाभिषेक सहित तमाम कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। बताते हैं कि भगवान शिव भक्तों को बाल रूप में दर्शन देते हैं। बाहरी पर्यटक भी मंदिर में आकर मत्था टेकना नहीं भूलते। रानीखेत का पंचेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन मंदिर है। 1996 में मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार हुआ इसके बाद शिव मंदिर कमेटी ने यहां गणेश, लक्ष्मी नारायण, दुर्गा, राम दरबार तथा हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित की गई। मंदिर के भीतर काली शिला की शक्ति पर शिव लिंग बना है। इसकी गहराई का किसी को भी अंदाजा नहीं है। आजादी से पहले यह मंदिर बदरीनाथ को जाने वाले तीर्थयात्रियों का पड़ाव भी हुआ करता था। शिवरात्रि पर्व पर यहां श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा देखी जा सकती है। सुबह तीन बजे से ही दूर दराज के श्रद्धालु यहां जलाभिषेक के लिए पहुंच जाते हैं। मंदिर परिसर से बाहर सड़क तक जलाभिषेक करने वालों की भीड़ लगी रहती है। मंदिर कमेटी के लोग फिर लाइन को व्यवस्थित करते हैं। शिवरात्रि पर यहां सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रमों की धूम मची रहती है। कमेटी के अध्यक्ष कैलाश पांडेय ने कहा कि कमेटी की तरफ से कृष्ण जन्माष्टमी पर झांकी प्रतियोगिता के अलावा तमाम छात्रवृत्तियां भी वितरित की जाती हैं।
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