अल्मोड़ा। जनवादी संगठनों से जुड़े लोगों ने संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर शनिवार को खेती बचाओ, लोकतंत्र बचाओ अभियान में गांधी पार्क में विरोध प्रदर्शन किया। धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने किसानों के हित में तीनों नए कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग की। वहीं केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
उत्तराखंड किसान सभा (अखिल भारतीय किसान सभा) के जिला मंत्री दिनेश पांडे के नेतृत्व में शनिवार को अघोषित इमरजेंसी, तानाशाही और कृषि कानूनों के खिलाफ खेती बताओ, लोकतंत्र बचाओ के संयुक्त मोर्चा के कार्यक्रम के तहत धरना दिया। वक्ताओं ने कहा कि 26 जून 1975 को देश में इंदिरा गांधी ने इमजेंसी लगाई थी और आज ही के दिन किसान आंदोलन को भी सात माह पूरे हो रहे हैं। इस कार्यक्रम को सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू)का भी समर्थन प्राप्त है।
वक्ताओं ने कहा कि 46 वर्ष पूर्व लागू इमरजेंसी को आज भी उसके बुरे दौर के लिए याद किया जाता है, लेकिन उसे भी जनता ने अपने संघर्ष की बदौलत शिकस्त दी। आज का समय उस घोषित इमरजेंसी से भी भयानक है। किसान सभा के जिला मंत्री पांडे ने कहा कि शनिवार को ही अखिल भारतीय किसान सभा के संस्थापक स्वामी सहजानंद की भी पुण्यतिथि है। जिनके नेतृत्व में किसानों ने आजादी के संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
सीटू के जिला मंत्री और राज्य कमेटी सदस्य आरपी जोशी ने किसान आंदोलन को समर्थन दिया। जनवादी महिला समिति की जिला सचिव राधा नेगी, प्रांतीय सचिव सुनीता पांडे, नौजवान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष यूसुफ तिवारी, जिला अध्यक्ष स्वप्निल पांडे ने भी सभा को संबोधित किया। धरने पर अरुण जोशी, मुमताज अख्तर, योगेश कुमार, दीपक कुमार, मुन्नी प्रसाद आदि शामिल रहे। धरने को मजदूर संगठन सीटू, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवाव भारत की जनवादी नोजवान सभा का समर्थन मिला।