अल्मोड़ा/बागेश्वर। देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के आह्वान पर पालिका के पर्यावरण मित्र (स्वच्छक कर्मी) दूसरे दिन भी हड़ताल पर जमे रहे। स्वच्छक कर्मियों ने आंदोलन तेज करते हुए मंगलवार को बारिश के बीच पालिका परिसर से मुख्य बाजार, मालरोड होते हुए जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। बाद में मांगों को लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री को ज्ञापन भी भेजा। इधर हड़ताल के कारण शहर के विभिन्न क्षेत्रों से दूसरे दिन भी कूड़ा नहीं उठा। जगह-जगह पर कूड़ेदान भर गए हैं और कूड़ा फैला हुआ है। शहर के बाजारों, मार्गों और पैदल रास्तों में भी कूड़ा बिखरा पड़ा हुआ। कूड़े से दुर्गंध उठने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना काल में सफाई नहीं होने से बीमारियों का भी खतरा बना हुआ है।
निकायों और सरकारी कार्यालयों में सफाई कार्य में लागू ठेका प्रथा समाप्त करने, नियमित नियु क्ति देने समेत ग्यारह सूत्रीय मांगों को लेकर पर्यावरण मित्र आंदोलित हैं। मंगलवार को भी पर्यावरण मित्रों ने पालिका कार्यालय परिसर में धरना दिया। दोपहर बाद बारिश के बीच नारेबाजी करते हुए मालरोड, मिलन चौक, लाला बाजार, चौक बाजार, कचहरी बाजार, थाना बाजार, चौघानपाटा होते हुए जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारी जुलूस में मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री और शासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे थे। इससे पहले पालिका प्रांगण में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार पर्यावरण मित्रों की मांगों के प्रति उदासीन बनी हुई है। जुलूस और सभा में प्रदेश महामंत्री राजपाल पवार, जिलाध्यक्ष दीपक चंदेल, राजेश टॉक, सतीश कुमार, सुरेश केशरी, यशपाल, रमेश, राजेंद्र पवार, अनीत समेत काफी संख्या में पर्यावरण मित्र शामिल हुए।
बागेश्वर में मंगलवार को पर्यावरण मित्रों ने जिलाध्यक्ष चंदन लाल के नेतृत्व में नगरपालिका परिसर के बाहर धरना देकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से उनकी मांगों को अनसुना किया जा रहा है। स मौके पर शाखा अध्यक्ष तेजपाल, गिरीश लाल, गीता देवी, दिनेश कुमार, कमला देवी, मुन्नी देवी आदि थे। कपकोट में कर्मचारियों ने तहसीलदार पूजा शर्मा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
शहर की नियमित सफाई जरूरी है। सरकार के स्वच्छक कर्मचारियों की मांगों का समाधान करवाना चाहिए, ताकि वह हड़ताल नहीं करें और शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो सके। - बसंत सिंह।
बाजार में जगह-जगह कूड़ा फैला हुआ है। हड़ताल से आम जनता को परेशानी हो रही है। बाजार में चलना दूभर हो गया है दुर्गंध से बीमारी का भी खतरा बना हुआ है। - जेएस राणा।
हड़ताल से सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। कूड़े के ढेर लग गए हैं। बारिश में बहकर कूड़ा नालियां भी जा रहा है और नालियां चोक हो रही हैं। सरकार को जल्द आंदोलित कर्मचारी संगठन से वार्ता करनी चाहिए। - राजेंद्र सिंह बाणी।
भिकियासैंण में स्वच्छक कर्मचारी हड़ताल पर डटे रहे
भिकियासैंण। देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के आह्वान पर नगर पंचायत भिकियासैंण के सफाई कर्मचारी भी दूसरे दिन हड़ताल पर डटे रहे। इससे निकाय क्षेत्र में भी कई स्थानों पर कूड़ा पड़ा हुआ है। आंदोलित कर्मियों ने नगर पंचायत कार्यालय परिसर में धरना दिया। धरने पर शाखा अध्यक्ष राकेश, महामंत्री सचिन कुमार, करन लाल, राहुल, कमला देवी, माया देवी, रीना देवी, रीना, गीता, चंद्रपाल आदि बैठे।
बागेश्वर में भी लगे कूड़े के ढेर
बागेश्वर। कर्मचारियों की हड़ताल के बाद नगर के गोमती पुल, तहसील मार्ग, चौक बाजार, नदीगांव, नुमाइशखेत मैदान के पास, भागीरथी, कांडा मार्ग, पिंडारी मार्ग आदि स्थानों पर कूड़े के ढेर लग गए। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आंदोलन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांगें जल्द नहीं सुनी गई तो हालात इससे भी बुरे हो सकते हैं। कपकोट नगर पंचायत के पर्यावरण मित्रों के आंदोलन में रहने से नगर क्षेत्र की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर कहा कि अगर जल्द कर्मचारियों की समस्याओं का निदान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे कर्मचारी
पर्यावरण मित्रों ने ठेका करने और नियमितीकरण करने, 12 जून 2015 को लागूू शासनादेश संख्या 757 में संशोधन करने, कनिष्ठ सहायकों, पर्यावरण पर्यवेक्षक, सफाई निरीक्षक, चालक आदि पदों पर पर पदोन्नति देने, परिवार में सरकारी सेवक होने के बाद भी मृतक आश्रितों को नियुक्ति प्रदान करने, वर्ष 2005 से बंद पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने, जीवन और स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने, राज्य कर्मचारियों की भांति भत्ते देने, धुलाई और टूल भत्तों में वृद्धि करने, निकायों के आयोजित आवासों पर मालिकाना हक देने, भूमिहीन वाल्मीकि समाज के लोगों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने, मृतक आश्रितों को मृतक नियमावली 1974 का लाभ देते हुए नियुक्ति प्रदान करने, पर्यावरण मित्र पदनाम को संसोधित करते हुए सफाई सैनिक नाम देने की मांग की है।