अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र के मामले में पीड़िता को इंसाफ के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। थाने से शुरू हुई इंसाफ मांगने की कहानी एसपी कार्यालय से होकर डीएम दफ्तर तक गई। पीड़ित का परिवार और उनके समर्थन में एकजुट हुए लोग चार दिन पहले पुलिस के थाने में प्रदर्शन कर कह रहे थे की बिटिया के साथ दुष्कर्म किया गया है। अगर एसा था तो आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी अथवा सत्ता का दबाव है कि दुष्कर्म का केस दर्ज नहीं किया गया। जबकि भाजपा ने आरोपी को पार्टी से बाहर कर दिया।
मंगलवार को जिले के एसपी देवेंद्र पिंचा ने पत्रकारों के समक्ष कहा कि मामला बेटी का था इसलिए मैंने प्राथमिकता दिखाई और आरोपी को गिरफ्तार कराया। उनका कहना था कि जो तहरीर मिली है वह केवल छेड़छाड़ की थी। अगर मामला केवल इतना भर था तो घटना के सामने आने के दिन ही जब जनता और पीड़िता के मां-बाप आरोप लगा रहे थे कि दुष्कर्म किया गया है तो मामला केवल छेड़छाड़ की धाराओं में क्यों दर्ज हुआ। अगर केस दर्ज कराते तो बेटी को थाने, पुलिस उपाधीक्षक के दफ्तर, पुलिस अधीक्षक और डीएम दफ्तर तक क्यों जाना पड़ता। क्या वजह रही कि दोबारा मेडिकल करना पड़ा।
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पुलिस यह कहकर अपनी पीठ थपथपा रही है कि हम ने तत्काल कार्रवाई की तभी आरोपी का न्यायिक रिमांड हमें मिल पाया वरना पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी भी नहीं करती क्योंकि जो मामला दर्ज हुआ है वह सात साल से कम की सजा के दायरे में आता है। लोग आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस धाराओं के तकनीकी चक्कर में फंसा कर पीड़िता के परिवारों वालों को गुमराह कर रही है।
पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पिंचा ने कहा कि लापरवाही नहीं बरती जाएगी और बिटिया को इंसाफ मिलेगा लेकिन डीएम के दफ्तर तक की जा रही परेड सिस्टम की नियत पर सवाल जरूर खड़े करती है । एसएसपी का कहना है कि पीड़िता का दोबारा मेडिकल कराया गया है अगर मेडिकल में मामला छेड़छाड़ से ज्यादा गंभीरता का निकलता है तो उसी हिसाब से धाराएं लगाई जाएगी।