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राजा ज्ञान चंद ने सिमल्टिया के पांडे परिवारों को 313 साल पहले दान में दिया था पूरा सिमल्टा गांव

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राजा ज्ञान चंद द्वारा दिया गया दुर्लभ तामपत्र। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। पुरातत्व विभाग को राजा ज्ञान चंद के शासनकाल के करीब 313 साल पुराने दुर्लभ ताम्रपत्र का पता चला है। इस ताम्र पत्र के जरिये राजा ज्ञान चंद ने दूनागिरि के निकट स्थित पूरा सिमल्टा गांव सिमल्टिया (पांडे) परिवारों को दान में
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दिया था। यह ताम्रपत्र सिमल्टा गांव के मूल निवासी अवकाश प्राप्त कर्नल दिव्यदर्शन पांडे के पास सुरक्षित रखा हुआ है। पुरातत्व विभाग जल्द ही इस ताम्रपत्र को विभाग में रजिस्टर्ड करने की कार्रवाई करेगा। ताम्रपत्र कुमाऊंनी भाषा और देवनागिरी लिपि में लिखा गया है। इसमें राजा ज्ञान चंद के बड़े पुत्र जगत चंद सहित कई लोग गवाह हैं।
कर्नल दिव्यदर्शन पांडे के पास मिला यह दुर्लभ ताम्रपत्र राजा ज्ञान चंद (द्वितीय) ने 15 जुलाई 1707 को सूर्यग्रहण के दिन जारी किया। 15 पंक्तियों के इस ताम्रपत्र में सबसे ऊपर किनारे पर श्रीहरीदाता लिखा है। 15 लाइनों के इस ताम्रपत्र में सिमल्टा गांव सिमल्टिया लोगों को दान में देने की घोषणा की गई है। ताम्र पत्र में सिमल्टिया परिवारों को गांव में लगने वाले हर तरह के कर भी माफ करने की बात लिखी है।
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क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद (जागेश्वर) मनोज जोशी को इस दुर्लभ ताम्रपत्र के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि अवकाश प्राप्त कर्नल दिव्यदर्शन पांडे वर्तमान में बंगलुरू में रहते हैं। ताम्रपत्र पांडे परिवार के पास ही रहेगा और जल्द ही इसे पुरातत्व विभाग में रजिस्टर्ड कर दिया जाएगा। डॉ. चौहान के मुताबिक सिमल्टा गांव के पांडे परिवार चंपावत के निकट स्थित सिमल्टिया गांव से यहां आए थे।
ताम्र पत्र का हिंदी अनुवाद
कुमाऊंनी भाषा और देवनागरी लिपि में लिखे गए ताम्र पत्र का हिंदी अनुवाद इस तरह है- महाराजाधिराज राजा ज्ञान चंद देव जी ने सूर्य ग्रहण के दिन सिमल्टा गांव दान कर सिमल्टिया लोगों को दिया। गांव में दो रास्ते, जिसमें नरसिंह राठ परिवार तथा नेगी राठ परिवार के सदस्यों और दो पीनाई राठ अर्थात ये सातों पाट सिमल्टिया परिवारों को दिया गया। सभी करों से मुक्त करते हुए जमीन के अंदर गढ़ा हुआ धन, आकाश से गिरी हुई वस्तु, नि:संतानी का धन भी गांव को दिया। गांव को सभी करों से मुक्त कर दिया। इसे राजा ज्ञान चंद की भावी पीढ़ी उपभोग करवाएगी और सिमल्टिया की पीढ़ी उपभोग करेगी।
ताम्रपत्र में ये लोग हैं साक्षी-
महाराज कुमार जगत सिंह गुसाईं (राजा जगत चंद), वीरेश्वर पांडे, पुरोहित लक्ष्मीपति पांडे, गुरुपहाड़ सिंह, हरिमल, गोध सिंह, कल्याण सिंह, गंगाधर पंडित, मान सिंह बिष्ट, रिषीकेश, भवानंद जोशी, नर सिंह चौधरी, सीरदार लक्ष्मीपति बिष्ट, लालजी, रामदास भंडारी, जगत रोज्याली। ताम्रपत्र दुर्गा साह ने आषाढ़ साके 1629 को हवालबाग में लिखा और भौना सुनार ने टंकण किया।
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