जब किडनी के मरीजों की बीमारी बढ़ जाती है और किडनी काम करना बंद कर देती है तब मरीज को डायलिसिस कराने की जरूरत पड़ती है। डायलिसिस के माध्यम से मरीज के शरीर में रक्त को फिल्टर किया जाता है। जिला अस्पताल में हंस फाउंडेशन के माध्यम से डायलिसिस की सुविधा तो उपलब्ध है लेकिन मात्र तीन बेड ही उपलब्ध हैं। इसके चलते अधिकतर मरीजों को डायलिसिस के लिए इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। संवाद
Iदो साल में मात्र 45 मरीजों को मिली सुविधाI
Iबागेश्वर। जिले में किडनी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मार्च में केंद्र में 18 लोगों का डायलिसिस किया जाना इसका उदाहरण है। जबकि पिछले दो सालों में केवल 45 मरीजों को ही डायलिसिस की सुविधा मिल सकी है। प्रतीक्षा सूची के मरीजों को जोड़कर देखें तो जिले में किडनी रोगियों की वास्तविक स्थिति कहीं अधिक है।I
कारण-
-जिला अस्पताल में कार्यरत डायलिसिस तकनीशियन दिया मंडल ने बताया की बहुत से लोग दर्द निवारक दवाइयों का सेवन करते हैं, इससे भी यह बीमारी बढ़ती है। दर्द निवारक दवाइयां किडनी में जमा होती रहती हैं। सिगरेट, बीड़ी पीने और मोटापे से भी किडनी की बीमारी होने का खतरा रहता है। ब्लड प्रेशर (बीपी) और शुगर का नियंत्रित रहना बहुत जरूरी है।
बचाव-
अपने खानपान का विशेष ध्यान रखें, अधिक से अधिक पानी पीएं, रोजाना व्यायाम करें, 35 से अधिक उम्र के लोग नियमित बीपी और शुगर की जांच कराएं, खाने में ज्यादा नमक और ज्यादा मीठा ना खाएं, चिकित्सक की सुझाई दवाइयों का ही सेवन करें।
Iकिसी का शुगर ज्यादा है और बीपी भी बढ़ रहा है तो इससे किडनी के खराब होने का खतरा बना रहता है। बीपी, शुगर वाले मरीजों को साल में दो बार स्क्रीनिंग करवानी चाहिए, इससे किडनी को बचाया जा सकता है।
- डॉ. चंद्र मोहन सिंह भैसोड़ा, फिजीशियन, जिला अस्पताल बागेश्वरI