यहां सिद्ध पीठ कालिका धाम दुर्गा मंदिर में जीवंत षोडशी भंडारा और भागवत कथा का समापन यज्ञ, पूर्णाहूति और विशाल भंडारे के साथ हुआ। मंदिर के महंत 96 वर्षीय पशुपति भारती ने उम्र की अधिकता के चलते महंताई छोड़ अपने बड़े शिष्य कुंभ भारती को सौंप दी। राजस्थान, गुजरात आदि स्थानों से पहुंचे साधु संतों ने नए महंत को आशीर्वाद दिया। कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र के आर्केस्ट्रा बैंड ने भी मधुर धुनें बिखेरी।
वयोवृद्ध महंत पशुपति भारती यहां कालिका मंदिर में 1969 में आए। बताया जाता है कि तब यह मंदिर काफी जीर्ण हालत में था। महाराज ने जन सहयोग से मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। भगवान शंकर और दुर्गा मंदिर की स्थापना की। इसके बाद से यह मंदिर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। मंदिर के पुनर्निर्माण के दौरान वयोवृद्ध महंत के पैर में कील चुभ गई थी, जिसे बाद में काटना पड़ा, तब से बाबा एक पैर पर मां की साधना में लीन रहे। इधर, उम्र की अधिकता के चलते बाबा ने महंताई अपने बड़े शिष्य कुंभ भारती को सौंप दी। इस दौरान चादर विधि और षोडशी भंडारे का आयोजन हुआ। इस आयोजन में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष महंत उमाशंकर भारती, महंत अमर भारती, धीरेंद्र भारती, बाबूपुरी महाराज, सुखदेव पुरी, राम भरती, जगदीश भारती, दौलत पुरी, राजेंद्र गिरि, रवि भारती आदि का जमावड़ा लगा रहा। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, उनकी पत्नी एडवोकेट पुष्पा भट्ट आदि जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।