सेना की भर्ती से संबंधित सूचनाएं स्पष्ट होनी चाहिए। सैकड़ों किमी दूर से यहां आकर पता चलता है कि खुली भर्ती नहीं है। आधा पेट भोजन मिला, रात भर ठंड झेलनी पड़ी सो अलग। यह कहना था देश सेवा का जज्बा पाले यूपी के दूर-दराज इलाकों से यहां पहुंचे युवकों का। बोले वे साधारण किसान परिवारों से हैं। इंटरनेट पर भर्ती की सूचना देखी, खुली भर्ती समझकर यहां आ गए। भर्ती के लिए आने वाले युवकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं मिलती हैं।
आगरा से पहुंचे सत्येंद्र सिंह ने कहा वह बीएससी बीएड हैं। माता-पिता खेती करते हैं। कमाई के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। दूसरी तरफ देश की सेवा करने का भी जज्बा मन में है, इसीलिए इंटरनेट पर रानीखेत में भर्ती मेले की सूचना मिली और यहां आ गए। यहां पहुंचने पर पता चला कि यह भर्ती केवल सैन्य परिवारों के युवकों की है। मन उदास हो गया, रात फुटपाथ पर बितानी पड़ी, पैसा की बर्बादी हुई सो अलग। भर्ती से संबंधित सूचनाएं स्पष्ट होनी चाहिए।
आगरा के ही बीए पास योगेश शर्मा ने कहा कि उनके परिवार के पास भी आजीविका के स्रोत नहीं हैं। सेना के माध्यम से राष्ट्र सेवा की इच्छा बचपन से ही है। भर्ती के लिए साथियों के साथ वह भी पहुंच गए। उन्होंने कहा कि समय और धन की बर्बादी हो गई। प्रशासन की तरफ से भर्ती युवकों के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए हैं, जिसके चलते वह लोग फुटपाथ पर रात गुजारने को मजबूर हो रहे हैं। उन्हीं की तरह सैकड़ों युवकों ने भी फुटपाथ पर रात बिताई।
आगरा के ही बीएससी पास कर्मवीर, इंटर पास कृष्ण पाल और अमित कुमार ने कहा कि उम्मीद लेकर आए थे, मायूस होकर लौट रहे हैं। खाना खाने के लिए होटलों के आगे घंटों लाइन में लगे रहे, इसके बाद भी भरपेट भोजन नहीं मिला। इधर, गत दिनों पुलिस और प्रशासन ने बैठक कर भर्ती युवकों के लिए तमाम व्यवस्थाएं करने के दावे किए थे, लेकिन इन युवकों की परेशानी देख दावे हवाई साबित हुए।