अल्मोड़ा चितई मंदिर में पशुबलि के लिए पहुंचे लोगों को समझाते गायत्री परिजन।
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अल्मोड़ा। हाईकोर्ट की ओर से पशु बलि प्रथा पर रोक लगाने के बाद भी लोग नवरात्र के अवसर पर मंदिरों में पशुुओं की बलि देने पहुंच रहे हैं। चितई गोलू मंदिर में भी इन दिनों कई लोग बलि के लिए जानवर लेकर आ रहे हैं। गायत्री परिवार ने पशु बलि रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया है। इससे प्रेरित होकर लोग मंदिर से बिना पशु बलि किए ही वापस लौट रहे हैं। नवरात्र शुरू होने से अब तक गायत्री परिवार चितई मंदिर में 16 लोगों को पशुबलि देने से रोक चुका है।
कुमाऊं में न्याय के देवता माने जाने वाले गोलू देवता से लोग मनोकामना मांगते हैं और मनोकामना पूरी होने पर उनके मंदिर में बकरे आदि की बलि देते हैं। हाईकोर्ट ने भी मंदिरों में पशु बलि पूरी तरह प्रतिबंधित की है। इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोग चोरी छुपे पशु बलि के लिए चितई मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर कमेटी भी लोगों को पशु बलि के खिलाफ जागरूक कर रही है। साथ ही गायत्री परिवार ने भी पूरे राष्ट्र में इसके खिलाफ अभियान चलाया है। नवरात्र में पशु बलि रोकने के लिए गायत्री परिवार की एक टीम रोजाना चितई गोलू मंदिर पहुंच रही है और वहां पशु बलि के लिए आने वाले लोगों को समझा रही है।
पहली नवरात्री को तीन लोग पशु बलि के लिए मंदिर पहुंचे थे लेकिन गायत्री परिजनों के समझाने पर वापस लौट गए। तीसरी नवरात्र में छह लोग पशु बलि के लिए मंदिर में पहुंचे थे। अब मंगलवार को भी हवालबाग, भैसियाछिना, लमगड़ा और नैनीताल के सात लोग पशुओं की बलि चढ़ाने मंदिर में पहुंचे थे। लेकिन गायत्री परिजनों के समझाने पर उन्होंने पशुओं की बलि नहीं दी। उक्त सभी लोगों ने गोलू देवता से लिखित में माफी मांगी और पशुओं को वापस लेकर लौट गए। यहां गायत्री परिवार के भीम सिंह अधिकारी, पूरन सिंह मेहरा, जगजीवन सिंह, हरीश चंद्र तिवारी, चिराग नेगी, मंजु जोशी, निर्मला अधिकारी, नीलम नेगी आदि मौजूद रहे।