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ललित कलाओं की भूमिका में संस्कृति और मौलिकता पर चर्चा

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अल्मोड़ा एसएसजे विवि में मंचासीन अतिथि और अन्य। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के दृश्यकला संकाय, चित्रकला विभाग और संस्कार भारती उत्तराखंड के संयुक्त रूप से तीन दिवसीय ऑन द स्पॉट चित्र निर्माण कार्यशाला और प्रतियोगिता शुरू हुई। ‘स्वाधीनता के 75 वर्षों में ललित कलाओं की भूमिका‘ विषय पर कार्यशाला और प्रतियोगिता का मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. एनएस भंडारी ने शुभारंभ किया।
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दूश्य कला में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य अतिथि प्रो. भंडारी ने दीप जलाकर शुभारंभ किया। कुलपति ने भारत की संस्कृति और उसकी मौलिकता के बारे में जानकारी दी। कहा कि विचारों का सर्जन बौद्धिक मस्तिष्क में होना चाहिए। कार्यक्रम संयोजक संकायाध्यक्ष प्रो सोनू द्विवेदी ‘शिवानी‘ ने कहा कि इस कार्यशाला में विभिन्न स्थानों से कलाकार जुड़े हैं।
विशिष्ट अतिथि संस्कार भारती पश्चिमी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड के क्षेत्र प्रमुख देवेंद्र सिंह रावत, प्रांतीय संयोजक और चित्रकार डॉ. गिरीश चंद्र शर्मा, अधिष्ठाता प्रशासन प्रो. प्रवीण बिष्ट, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. संजीव आर्या ने भी अपने विचार रखे। यहां डॉ. देवेंद्र सिंह बिष्ट, प्रो. शेखर चंद्र जोशी, डॉ. ललित चंद्र जोशी ‘योगी, डॉ. सागर भैसोड़ा आदि मौजूद रहे।
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