अल्मोड़ा में चाय की एक दुकान में चाय की चुस्कियों के बीच राजनीति पर चर्चा करते लोग।
- फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। राजनीतिक पार्टियां जैसे-जैसे प्रत्याशियों की सूची जारी कर रही है वैसे ही चाय के नुक्कड़ों में पर भी राजनीति बहसें भी परवान चढ़ रही है। लोग चाय पीने के दौरान अपना गणित लगाकर हार किसकों कितनी सीटें मिलेंगी का दावा करते नजर आए।
माल रोड में जिला अस्पताल के निकट एक चाय के नुक्कड़ पर कुछ लोग चाय की घूंट पी रहे थे। चाय विक्रेता चाय बनाने में मशगूल थे। वहां कुछ लोग चाय पी रहे थे। चाय की चुस्की लगाते हुए एक सज्जन बोले जैसे मौसम पल-पल रंग बदल रहा है वैसे ही नेता भी इन दिनों रंग बदल रहे हैं। जो कभी गांव में नहीं आते अब गांव में लोगों के घर-घर का चक्कर काट रहे हैं। अभी वह आगे कुछ कह रहे थे कि इतने में तपाक से दूसरे सज्जन ने अपनी बात कह डाली। कहने लगे यार आजकल की राजनीति भी स्वार्थी हो गई। कोई अपने बेटे तो कोई बहु के लिए टिकट की खींचतान कर रहे हैं। सवालिया लिहाजा में कहने लगे की क्या अब राजनीति भी विरासत में यूं ही चलेगी। इतने में तीसरे सज्जन ने चाय का प्याला टेबल रखा और गंभीर मुद्रा में कहने लगे आज की राजनीति भी समझ में नहीं आती। नेता चुनावी मौसम में कल पाला बदल डाले यह कहा नहीं जा सकता है। कोई इस पार्टी से फला पार्टी में जा रहा है तो कोई पार्टी पर ही सवाल कर रहा है। सास बहु के झगड़ों की तरह ही नेताजी में भी आपसी कलह हो रही है। ऐसे में इनसे विकास की क्या उम्मीद करें। चाय की प्याली हाथ में पकड़ कर मनोज साह ने एक घूंट मारी और फिर कहने लगे भुला नेतागिरी बहुत बदल गई है। नेता भी मौसम देखकर बोलने लगे हैं। पर हमें तो अपना काम करना है अर्थात मताधिकार का प्रयोग करना है। बात आगे बढ़ाते ओमप्रकाश कहने लगे कोई नेता बनेगा, कोई मंत्री पर हमे तो रोजगार चाहिए। भगवान ने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान होना चाहिए चाहे कोई जीते या हारे।