ल्मोड़ा बेस अस्पताल में लगी डायलिसिस मशीन
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अल्मोड़ा। नगर और आसपास क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो इलाज के लिए वह जिला और बेस अस्पताल पर निर्भर है। लेकिन बेस अस्पताल की हालत यह है कि मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट होने के बाद यह खुद ही बीमार हो गया है। मरीजों की सुविधा के लिए यहां तीन डायलिसिस मशीनें लगी हैं जिसमें से एक मशीन अक्सर खराब रहती है। कभी तीनों मशीनों का संचालन बंद हो जाता है जिससे मरीज को डायलिसिस के लिए हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ती है।
बेस अस्पताल में रोजाना करीब दो मरीज डायलिसिस के लिए पहुंचते हैं। डायलिसिस की एक सिटिंग का खर्च करीब ढाई हजार रुपये आता है। यहां तीन डायलिसिस मशीनें लगी हैं लेकिन एक मशीन अक्सर खराब रहती है। अभी भी एक मशीन खराब होने के कारण करीब एक सप्ताह से बंद पड़ी है। स्टाफ का कहना है कि तकनीकी दिक्कतों से मशीन को संचालित नहीं किया जा रहा है। कभी स्थिति यह होती है कि यूपीएस में फॉल्ट आने के कारण तीनों मशीनें नहीं चलती हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों का डायलिसिस नहीं हो पाता और मरीज गाड़ी बुक कर हल्द्वानी जाते हैं। जिससे उनका एक डायलिसिस का खर्च करीब पांच हजार रुपये आता है। डाक्टर की सलाह पर किसी मरीज को सप्ताह में एक और किसी को दो डायलिसिस करनी पड़ती है।
बेस अस्पताल में लगी डायलिसिस मशीन कुछ दिन पहले ठीक हालत में काम कर रही थी। अभी खराब होने का मामला संज्ञान में नहीं है। अगर मशीन खराब या किसी कारण से बंद है तो उसे ठीक कराया जाएगा जिससे मरीजों को डायलिसिस कराने में परेशानी न हो।
- डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा।