रानीखेत (अल्मोड़ा)। भूस्खलन की चपेट में आकर पत्रकार आनंद नेगी अब इस दुनिया में नहीं रहे। स्व. नेगी के पिता मदन सिंह दोमंजिले मकान के भूतल में बने गोठ वाले कमरे में सोते थे, इसीलिए उन्होंने भी वहीं गोठ में सोने का फैसला किया था जबकि उनकी पत्नी उषा दोमंजिले पर बने कमरे में सो रहीं थीं। सोमवार रात अचानक चट्टान का मलबा मकान पर गिरा और वह अपने बड़े भाई की पुत्री के दो बच्चों के साथ मलबे में ही जमींदोज हो गए।
मंगलवार दोपहर बाद उनका शव बरामद हुआ। कुछ दिन पहले ही वह रानीखेत आकर सभी परिचितों से मुलाकात कर गए थे। उन्हें अपने पैतृक गांव रापड़ से बेहद लगाव था। रानीखेत में उच्च शिक्षा लेने के बाद वर्ष 1992 में अमर उजाला से जुड़े और अधिकतर समय यहीं पत्रकारिता की। अंतिम समय में वह गांव चले गए और किसे मालूम था कि सोमवार रात की आपदा उन्हें लील जाएगी।
पत्रकार नेगी ने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत से एमए किया था। यहां वह छात्रसंघ उपाध्यक्ष भी रहे। लिखने-पढ़ने के शौकीन नेगी ने उत्तराखंड आंदोलन के दौरान अपनी कलम से आंदोलन को काफी धार दी। हालांकि कुछ समय वह अल्मोड़ा भी रहे। वर्ष 2012 तक उन्होंने रानीखेत ब्यूरो प्रभारी के रूप में कार्य किया। इसके बाद उनका स्थानांतरण बागेश्वर के लिए हो गया। वहां कुछ साल बिताने के बाद वीआरएस लेकर वह रानीखेत आ गए। यहां वह लोक चेतना मंच से भी जुड़े, लेकिन उनका असली मन गांव में बसता था।
इसीलिए वह अक्सर कहते थे कि पैतृक आवास को ठीक कर वहां खेती करूंगा। पिछले दो साल से वह गांव में ही रहकर खेती के साथ ही सोशल मीडिया से भी जुड़े थे। विधायक करन माहरा, ब्लॉक प्रमुख हीरा रावत, छावनी के पूर्व उपाध्यक्ष मोहन नेगी, संजय पंत, पूर्व दर्जा राज्यमंत्री नरेंद्र रौतेला, महिला आयोग की उपाध्यक्ष ज्योति साह, पूर्व प्रमुख धन सिंह रावत, विधि आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष दिनेश तिवारी, विपिन शर्मा, रोहित शर्मा, डॉ. प्रमोद नैनवाल, राजेंद्र बिष्ट आदि ने शोक जताया है।
ग्राम पंचायत गंगोड़ा के रापड़ में इसी मकान में मलबा घुसने से पत्रकार आनंद नेगी और उनके पोता-पोती ?- फोटो : ALMORA