द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। ऐतिहासिक स्याल्दे बिखोती के मुख्य मेले में ऑल और गरख धड़े के हजारों लोगों ने शिरकत की। दोनों धड़ों ने 18 जोड़े नगाड़े निशानों के साथ ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। हजारों लोग इस पल के गवाह रहे। घटगाड़ से ग्रामीण ढोल नगाड़ों, नगारे निशानों के साथ श्रंकार नृत्य करते हुए मेला स्थल तक पहुंचे। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। महंगाई को लेकर जमकर झोड़ों का गायन हुआ। रसोई गैस सिलिंडरों के दाम बढ़ने पर चिंता जताई गई। मेले के दौरान रुक-रुककर हुई बारिश ने भी व्यवधान डाला।
ऑल धड़े के ग्रामीणों ने सबसे पहले ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। ऑल धड़े में किरोली, पिनोली, तल्ली मिरई, मल्ली मिरई, डढोली और बिजेपुर के सैकड़ों ग्रामीण शामिल थे। साढ़े पांच बजे गरख धड़े के लोग भी ढोल न गाड़ों और निशानों के साथ लाठियां लहराते हुए मेला स्थल पहुंचे। उन्होंने भी ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। गरख दल में बेढुली, सिमलगांव, असगोली, बसेरा, सलना और बूंगा के ग्रामीण शामिल थे। मेला देखने पहुंचे हजारों लोगों ने इस रस्म को देखा। दोनों धड़ों के लोग 18 जोड़े नगाड़े निशानों के साथ पहुंचे थे। इससे पूर्व घटगाड़ से श्रंकार नृत्य करते हुए ग्रामीण मेला स्थल पर पहुंचे। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। युवाओं के साथ ही बुजुर्गों में भी खासा जोश देखा गया। मोहना तेरी बंशी बाजी, राधिका नाची छमाछम, ठुमा ठुमा गंग नै ऊं लो, ऊंछै साई म्यार दगाड़, जब ऊंलो घर त्यारा तब हुंलो तेरि पधानी, सरकारी जंगल लछिमा निकाट बांजा, माठूं मांठ जाली इंटरा कालेजा, ओ साई परुली साई पाणि पिलै दे पाणि सहित तमाम पारंपरिक झोड़े गाए गए।
कंट्रोला मजी ग्यूं ऐ रयी छोड़ दे हेमा खेति
द्वाराहाट। स्याल्दे बिखोती मेले में नए नए झोड़ों की धूम रहती है। इस बार बाल प्रहरी के संपादक उदय किरोला और गोपाल सिंह द्वारा फ्री राशन पर कटाक्ष करते हुए झोड़ा बनाया गया है। लोग भी इस झोड़े पर जमकर थिरके। कंट्रोला मजी ग्यूं ऐ रयीं, छोड़ दे हेमा खेति, रोज बजारा घूमूंणा जाली, चाउमीन खाली वती.. सरकारा दीं रें फ्री राशना, छोड़ दे हेमा खेती. रोज चलाली मोबाइला, छोड़ दे हेमा खेती, खात में ऐगईं द्वी हजारा छोड़ दे हेमा खेती। यह झोड़ा काफी लोकप्रिय रहा।
मेले में झूले चरखों को देख बच्चे उत्साहित
द्वाराहाट। मेले के दौरान झूला, चरखा, मिक्की माउस आदि को लेकर बच्चों सहित युवाओं में भारी उत्साह देखा गया। कोरोना के कारण दो साल बाद आयोजित मेला इस बार पूरे उफान पर है। मेले में इस बार बाहरी व्यापारी भी काफी संख्या में पहुंचे हैं।
व्यापार संघ और टैक्सी यूनियन ने वितरित किया जूस
द्वाराहाट। मुख्य मेले पर युवाओं ने व्यापार संघ और टैक्सी यूनियन के सहयोग से त्रिमूर्ति चौराहे पर प्याऊ (ठंडा जूस) वितरित किया। इस कार्य की लोगों ने सराहना की। यहां उमेश पांडेय, विनोद जोशी, दीपक चौधरी, अर्जुन खंपा, दिनेश जोशी, दीपक अधिकारी, कमल साह, आदि ने सहयोग किया।
बिनसरा धूरा आओ घास काटणा घस्यारी
द्वाराहाट। जय श्री राम लोक कला केंद्र अल्मोड़ा तथा विहान लोक सांस्कृतिक कला मंच अल्मोड़ा की टीमों ने देर रात्रि तक कुमाऊंनी, गढ़वाली सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समां बांध दिया। सांझ पड़ी, सांझ वही माया चड़ी रौ सांध्य गीत के साथ बिनसरा का धूरा आओ घास काटणा घस्यारी, नैनीताले की विमला छोरी रूमा झुम छपेली आदि प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। संचालन ग्रुप अध्यक्ष देवेंद्र भट्ट ने किया।
जैनोली के चैतव मेले में झोड़ा गायन की धूम
रानीखेत (अल्मोड़ा)। जैनोली में ऐतिहासिक चैतव म्यल में झोड़ा गायन की धूम मची रही। सैमधार मंदिर परिसर में आयोजित एक दिवसीय मेले में सुबह के समय आसपास के विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों के साथ शिरकत की। मंदिर परिक्रमा के बाद झोड़ा गायन का दौर चला। भारी संख्या में बाहर से आए लोगों ने दुकानें भी सजाई थी। मुख्य अतिथि विधायक डा. प्रमोद नैनवाल ने मेलों के संरक्षण के लिए सहयोग का आश्वासन दिया।
जैनोली में हर साल बैसाखी के दिन चैतव म्यल का आयोजन होता है। इस अवसर पर ग्रामीणों की टीमें मंदिर की परिक्रमा करते हैं। इस बार पिलखोली, जैनोली, जोग्याड़ी, शिलंगी, चमोली, तस्वाड़, खग्यार, डौनी, उपराड़ी, बजीना बजोल, टाना, पन्याली, डौरब, टूनाकोट, भडग़ांव के ग्रामीण नगारे निशानों के साथ झोड़ा गाते हुए सुबह मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। खोलि दे माता खोल भवानी धारमां किवाड़ा सहित तमाम पारंपरिक झोड़े गाए गए। पहले यहां बग्वाल खेली जाती थी। बीडीसी त्रिभुवन फर्त्याल ने मेले में व्यवस्थाएं चाक चौबंद कराने के लिए सभी विभागों का आभार जताया। पिलखोली निवासी प्रधान संगठन के पूर्व प्रदेश महामंत्री हरी सिंह नेगी ने कहा कि इस ऐतिहासिक मेले को राज्य मेले का दर्जा आज तक नहीं मिल सका है। वहां पर पूर्व प्रधान प्रदीप बिष्ट आदि थे।
मेले में ओड़ा भेंटने जाते आल धड़े के लोग। संवाद- फोटो : RANIKHET
मेले के दौरान ओड़ा भेंटने जाते गरख धड़े के लोग। संवाद- फोटो : RANIKHET