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अधिक बारिश से धान की फसल बर्बाद, किसानों को घर परिवार चलाने की चिंता

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सोमेश्वर के नाखेत में खेतों में खड़ी धान की बर्बाद फसल दिखाते किसान गणेश बोरा। - फोटो : ALMORA
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सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। सोमेश्वर क्षेत्र के चावल की फसल पर इस बार मौसम की मार पड़ी है। पूरे क्षेत्र में इस बार धान की फसल ठीक होने से किसानों को धान की पैदावार बड़े पैमाने पर होने की उम्मीद थी लेकिन बारिश ने काफी हद तक फसल को नुकसान पहुंचाया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी टीम ने रविवार को सोमेश्वर के धान उत्पादन क्षेत्रों का दौरा किया। अत्यधिक बारिश से खेतों का नजारा बदला हुआ था। धान की कटी फसल खेतों में पानी भरने से सड़ गई थी तो खड़ी फसल बारिश से बर्बाद हो चुकी थी। सोमेश्वर क्षेत्र धान उत्पादन के लिए मशहूर है। यहां के कई गांवों में धान की फसल का प्रमुखता से उत्पादन किया जाता है।
इस बार क्षेत्र में धान की फसल अच्छी हुई थी लेकिन फसल कटान के समय एक माह में कई बार हुई बारिश से धान की फसल बर्बाद हो गई है। कई किसानों ने धान की फसल काटी लेकिन भारी बारिश के कारण खेतों में काफी पानी भरा और धान की फसल पानी में डूबने से सड़ गई। यहां के चावलों की मांग अल्मोड़ा और हल्द्वानी समेत दिल्ली तक है। इन शहरों में सोमेश्वर के धान के चावलों की काफी खपत होती है।
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सोमेश्वर आने वाले पर्यटक और अन्य लोग सौगात के रूप में यहां के चावलों को अपने साथ ले जाते हैं। यहां के धान का चावल फुटकर में 25-30 रुपये प्रति किलो बिकता है। बाजार के चावलों से यह चावल जहां काफी सस्ता होता है वहीं इसकी खुशबू भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। संवाद
इन गांवों में होती है धान की खेती
अल्मोड़ा। सोमेश्वर क्षेत्र के मल्ला खोली, भाना राठ, अर्जुन राठ, वमनथलिया, नारंगतोली, रौतेला गांव, टाना, सजोली, बैगनिया, पल्यूड़ा, हट् यूड़ा, दलमोड़ी, भंडारीगांव, रैत, सर्प, माला, अधूरिया, जाल धौलाड़, मेहरागांव, रनमन, बजेली, चनौदा, खीराकोट, सैल, बूंगा, खाड़ीसुनार, दियारी, डुंगरकोट, बले, सुकराड़, भैसड़गांव आदि।
फसल बर्बाद होता देख किसानों का फट रहा कलेजा
अल्मोड़ा। खेत में खड़ी फसल बर्बाद होता देख किसानों का कलेजा फट रहा है। किसानों ने कहा कि साल भर की मेहनत को बारिश ने एक झटके में चकनाचूर कर दिया। बच्चों की स्कूल फीस बाकी है, कई किसानों को अपनी बेटियों के हाथ पीले करने हैं, नया बीज लाना है, फिर से खेत तैयार करने के लिए मजदूरों को तलाशना है। लेकिन नुकसान होने के बाद वह किस तरह से यह सारी व्यवस्था करेंगे उसके लेकर परेशान हैं।
पिछले कई सालों से धान की खेती कर रहा हूं। इस बार बारिश से कहीं का न छोड़ा। खड़ी और कटी धान की फसल बर्बाद हो गई है। इससे किसानों में मायूसी है। सरकार को प्रभावित किसानों को धान की बर्बाद हुई फसल का मुआवजा देना चाहिए ताकि उन्हें राहत मिल सके।
- मोहन सिंह, बिजोरिया (पच्चीसी)
धान की फसल हजारों किसानों की आजीविका का साधन है। इस बार धान की फसल से किसानों की काफी उम्मीद थी लेकिन फसल बर्बाद होने से किसानों के सपने चूर-चूर हो गए। किसानों को राहत के तौर पर सरकार को जल्द मुआवजा देना चाहिए।
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- चंदन भारती, हट् यूडा (सोमेश्वर)
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