अल्मोड़ा। जिले में किशोर न्याय बोर्ड का गठन किया गया है जहां आपराधिक मामलों में पकड़े गए किशोरों के मामलों में सुनवाई की जाती है। सप्ताह में मात्र एक दिन मंगलवार को यह कोर्ट चलती है। यहां प्रधान न्यायाधीश का पद एक महीने से खाली चल रहा है। इस कारण वर्तमान में किशोर न्याय बोर्ड में 23 मामले विचाराधीन चल रहे हैं।
किशोरों से संबंधित अपराधों के लिए जिले में किशोर न्याय बोर्ड संचालित होता है। किशोर न्याय बोर्ड में तीन सदस्य होते हैं। इनमें दो सदस्य सामाजिक और चिकित्सा क्षेत्र से होते हैं। एक प्रधान न्यायाधीश को नियुक्त किया जाता है। न्यायिक अधिकारियों के प्रमोशन और स्थानांतरण होने से अल्मोड़ा किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश का पद अप्रैल से रिक्त चल रहा है। नियमानुसार अगर प्रधान न्यायाधीश के अतिरिक्त दो सदस्यों में से एक भी सदस्य मौजूद नहीं होता है तो मामलों की सुनवाई होगी पर फैसला नहीं हो पाएगा और अंतिम फैसले के लिए प्रधान न्यायाधीश का होना आवश्यक होता है।
किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 7(3) कहती है कि किशोर न्याय बोर्ड के किसी सदस्य की अनुपस्थिति के होते हुए भी बोर्ड कार्यवाही कर सकेगा। कार्यवाही के किसी भी प्रक्रम के दौरान बोर्ड के द्वारा पारित आदेश किसी सदस्य की केवल अनुपस्थिति के कारण अवैध नहीं होगा लेकिन मामले के अंतिम निस्तारण के समय या धारा 18 की उपधारा (3) के अधीन आदेश देने में कम से कम दो सदस्य जिनमें प्रधान मजिस्ट्रेट शामिल हैं, उपस्थित होंगे।
किशोर न्याय बोर्ड अल्मोड़ा में प्रधान न्यायाधीश का पद रिक्त चलने और नई नियुक्ति करने के संबंध में शासन को पत्र भेज दिया गया है। वर्तमान में किशोर न्याय बोर्ड में किशोरों से संबंधित 23 मामले विचाराधीन चल रहे हैं।
- राजीव नयन, जिला प्रोबेशन अधिकारी
किशोर न्याय बोर्ड अल्मोड़ा में प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति जल्द होनी जरूरी है जिससे किशोरों के मामलों का त्वरित निस्तारण हो पाए। प्रधान न्यायाधीश की जल्द नियुक्ति के संबंध में जिला बार एसोसिएशन अल्मोड़ा की ओर से शासन और मुख्य न्यायाधीश उत्तराखंड को पत्र लिखा जाएगा।
- शेखर लखचौरा, अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन अल्मोड़ा