फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ग्रामीणों के मौन प्रदर्शन पर जिम्मेदारों के आंख-कान बंद

विज्ञापन
भिकियासैंण के कनगड़ी में न्याय की उम्मीद में मौन प्रदर्शन करते लोग। - फोटो : ALMORA
विज्ञापन
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। तहसील भिकियासैंण के ग्राम पंचायत मडुली स्थित ग्राम कनगड़ी में करंट से झुलसी महिला को पांच महीने बाद भी न्याय नहीं मिल पाया है। वह घर पर ही जिंदगी की जंग लड़ रही है। परिजन और पड़ोसी गांव में ही मौन प्रदर्शन कर न्याय की गुहार लगा रहे हैं लेकिन अफसर और जनप्रतिनिधि न सुन रहे हैं न ही देख रहे हैं।
विज्ञापन

कनगड़ी निवासी भागुली देवी 27 जनवरी की शाम खेत में लकड़ी लेने गई थी। कुछ लोगों ने जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए खेत में बिजली का तार बिछाया था। भागुली देवी तार की चपेट में आने से झुलस गईं थीं। घटना के दो दिन बाद सदमे में उनके पति की भी मौत हो गई। भागुली को भिकियासैंण, काशीपुर और एसटीएच हल्द्वानी में भर्ती कराया गया लेकिन तबियत में सुधार नहीं हुआ।
उनके बेटे ने इस मामले में राजस्व क्षेत्र में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी मगर कुछ नहीं हुआ।
हमको न्याय चाहिए
परिजन और पड़ोसी रोजाना एक स्थान पर एकत्र होते हैं और हमको न्याय चाहिए लिखा बोर्ड सामने रखकर मौन प्रदर्शन करते हैं। जगदीश नैलवाल, दीपक नैलवाल, विनोद, गोपाल पपनै, धीरज, कन्नू, गिरीश और चंपा नैलवाल कहते हैं कि पुलिस-प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री के दरबार में ज्ञापन भेजने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई है। लोगों के पास तहसील मुख्यालय आने-जाने के लिए पैसा नहीं है इसलिए गांव में ही मौन प्रदर्शन के माध्यम से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।
विज्ञापन

तीन साल से पंचायत घर में रह रहे बुजुर्ग
दिव्यांग को नहीं मिल रही एक अदद छत
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। मानसिक रूप से विक्षिप्त अपने जवान बेटे के साथ तीन साल से गांव के पंचायत घर में रह रहे दिव्यांग हरकराम (70) ने गांव के लोगों से चंदा कर उसके लिए मकान बनाने की अपील की है। तीन साल पहले मंजूर उसका अटल आवास सरकारी फाइलों में गुम हो गया है।
हरकराम का पैतृक घर जीर्णशीर्ण है। आमदनी का कोई साधन नहीं है। विकलांग पेंशन के सहारे अपना और अपने जवान बेटे का पेट पाल रहा है। इकलौता बेटा भी मानसिक रूप से कमजोर है। पत्नी कई साल पहले छोड़ कर चली गई। पहले लकड़ी का चूल्हा था अब उज्जवला योजना से रसोई गैस मिलने से थोड़ा राहत है। तीन साल से पिता-पुत्र गांव के पंचायत घर में किसी तरह समय बीता रहे हैं।
गांव के सामाजिक कार्यकर्ता हंसादत्त ने बताया कि अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद तीन साल पहले अटल आवास स्वीकृत होने संबंधी पत्र आया था परंतु लंबा समय बीत जाने के बाद भी आवास का कोई सुधलेवा नही है।
तुम मुझे चंदा दो, मैं तुम्हें दुआ दूंगा।
हरक राम ने जनता के नाम लिखे खुले पत्र में कहा है कि मकान के लिए ब्लाक मुख्यालय से लेकर जिला मुख्यालय तक हर तरफ गुहार लगाई परंतु अब थक हार चुका हूं। आश्वासन के सिवाय कुछ नही मिला है। सभी लोग कुछ अंशदान देकर चंदा जमा करें ताकि वह अपने रहने लायक मकान बना सके। यह भी लिखा है कि तुम मुझे चंदा दो, मैं तुम्हें दुआ दूंगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें