जिले में न्यूरो सर्जन और फिजिशियन नहीं
गोविंदी को देवायल सीएचसी पहुंचाया गया तो उसके सिर पर लगी चोट देख डॉक्टरों ने न्यूरो सर्जन या फिजिशियन की जरूरत बताई और रेफर कर दिया गया। जिले में संचालित किसी भी सरकारी अस्पताल के साथ ही सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में भी न्यूरो के डॉक्टर न होने से परिजन उन्हें जिला मुख्यालय पहुंचाने की हिम्मत नहीं कर सके और बेहतर उपचार की उम्मीद में उन्हें दिल्ली ले गए मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पलायन से आधे बच गए लोग, स्कूलों में लग गए ताले
सल्ट का खदेरागांव सड़क न पहुंचने से पलायन की मार झेल रहा है। हालात यह है कि एक दशक पूर्व यहां निवास करने वाली 500 की आबादी अब सिर्फ 200 रह गई है। युवाओं ने पूरी तरह पलायन कर लिया। यहां केवल बूढ़े-बुजुर्ग ही रह रहे हैं। प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल में एक भी छात्र न होने से इनमें ताले लटकाने पड़े हैं। मरीजों को सड़क तक चारपाई से लाने के लिए युवाओं को खोजने में ही घंटों समय लग गया।
घायल महिला को अस्पताल लाया गया था, उसकी गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर किया गया। उनके सिर में गंभीर चोट थी। -डॉ. अक्षय, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी, देवायल।
गांव की वृद्धा गिरकर घायल हो गई। सड़क न होने से उसे किसी तरह चरपाई के सहारे अस्पताल पहुंचाया गया। चरपाई से ले जाने के लिए युवा नहीं मिले। यदि सड़क होती तो महिला को अपनी जान न गंवानी पड़ती।
-हेमा देवी, प्रधान, खदेरागांव।