अल्मोड़ा। बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत तीनों जिलों में आज तक जेल नहीं है। जिससे अल्मोड़ा समेत इन चारों जिलों के कैदी अल्मोड़ा में ही रखे जाते हैं। अल्मोड़ा जेल में 102 कैदी ही रखे जा सकते हैं, लेकिन यहां औसतन 120 से 130 कैदी रहते हैं। जगह कम होने के कारण कैदियों को रखने में दिक्कत आ रही है। अल्मोड़ा जेल में स्टाफ की भी भारी कमी है।
अल्मोड़ा में आजादी से पहले की जेल है। अल्मोड़ा के अलावा बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों में आज तक जेल नहीं बनाई गई हैं। जिससे इन जिलों के कैदियों को भी अल्मोड़ा में रखा जाता है। ऐसे में खास तौर पर कैदियों को पेशी के लिए वाहनों में संबंधित जिले में ले जाना पड़ता है और फिर उन्हें रात तक अल्मोड़ा वापस लाया जाता है।
जिससे कई बार सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी आती हैं। जेल में स्टाफ की भी भारी कमी है। जानकारी के मुताबिक जेल में बंदी रक्षकों के करीब आधे से अधिक पद खाली पड़े हैं। डिप्टी जेलर मेघराज सिंह ने बताया कि अल्मोड़ा जेल में दो छोटी, एक बड़ी और एक महिला बैरक है। उन्होंने बताया कि जेल में अतिरिक्त बैरकों की जरूरत को देखते हुए दो जीर्ण पड़ी बैरकों को दुरुस्त करने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
अल्मोड़ा। राज्य बनने के बाद से ही अल्मोड़ा जेल के अस्पताल में स्थाई डाक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। कैदियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जेल में डाक्टर की व्यवस्था की गई है। इसके तहत हर रोज डाक्टर आकर बीमार कैदियों के स्वास्थ्य की जांच करते हैं। जेल के अस्पताल में एक संविदा फार्मेसिस्ट तैनात है।